श्री योग वासिष्ठ महारामायण | Yoga Vashishtha Maharamayan PDF In Hindi

योग वशिष्ठ संक्षिप्त – Yog Vashishtha Maharamayan PDF Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

योगवासिष्ठ संस्कृत सहित्य में अद्वैत वेदान्त का अति महत्वपूर्ण ग्रन्थ है। इसमें ऋषि वसिष्ठ भगवान राम को निर्गुण ब्रह्म का ज्ञान देते हैं।

विद्वत्जनों के अनुसार सुख और दुख, जरा और मृत्यु, जीवन और जगत, जड़ और चेतन, लोक और परलोक, बंधन और मोक्ष, ब्रह्म और जीव, आत्मा और परमात्मा, आत्मज्ञान और अज्ञान, सत् और असत्, मन और इंद्रियाँ, धारणा और वासना आदि विषयों पर कदाचित् ही कोई ग्रंथ हो जिसमें ‘योग वासिष्ठ’ की अपेक्षा अधिक गंभीर चिंतन तथा सूक्ष्म विश्लेषण हुआ हो।

योगवासिष्ठ ग्रन्थ छः प्रकरणों में पूर्ण है।

  1. वैराग्यप्रकरण (३३ सर्ग),
  2. मुमुक्षु व्यव्हार प्रकरण (२० सर्ग),
  3. उत्पत्ति प्रकरण (१२२ सर्ग),
  4. स्थिति प्रकरण (६२ सर्ग),
  5. उपशम प्रकरण (९३ सर्ग) तथा
  6. निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध १२८ सर्ग और उत्तरार्ध २१६ सर्ग),

श्लोकों की संख्या २७६८७ है। वाल्मीकि रामायण से लगभग चार हजार अधिक श्लोक होने के कारण इसका ‘महारामायण’ अभिधान सर्वथा सार्थक है।

योगवासिष्ठ किसकी रचना ?

यो योगवासिष्ठको वाल्मीकिकी रचना बतलाया गया है। कई लोग इसमें ‘उवाच’ आदि अलकारोंकी भरमार देखकर अन्यकी कृति समझते हैं।

पर जो हो, यह तो उन्हे मी मानना पड़ेगा कि पदमाधुर्य, भावगाम्भीर्य, निरूपणौली, तत्त्वप्रदर्शन, सूक्ष्मेमिका, प्रखरविचार सर्वत्र नवीनता तथा अमृतोपम पवित्रतम साधु उपदेशोंकी शृङ्खला देखते हुए यह वाल्मीकि रामायण या विश्वके किसी भी अन्यसे निम्नकोटिका नहीं है ।

अतः इसका रचयिता जो भी हो, साक्षात् ईश्वर है या ईश्वरप्राप्त है । ग्रन्थ सर्वथा निर्दोष है। कई प्रकरण तो वाल्मीकिसे मिलते भी हैं।

विश्वामित्र दशरथ-सवादमें प्रायः वाल्मीकिके ही श्लोक हैं। जो अधिक हैं, वे रम्यतर हैं। ‘उवाच’ आदि लिखना भिन्न शैली अपनाना भी एक लेखकद्वारा सम्मत्र है ही । अतः वाल्मीकिरचित मानना युक्तिसंगत ही है।

पुस्तक में समाविष्ट कुछ विषय

  1. विश्वामित्र का अपने यशकी रक्षा के लिये श्रीरामको माँगना और राजा दशरथका उन्हें देनेमें अपनी असमर्थता दिखाना
  2. विश्वामित्रका रोष, वसिष्ठजीका राजा दशरथको समझाना, राजा दशरथका श्रीरामको बुलानेके लिये द्वारपालको भेजना तथा श्रीराम सेवकोंका महाराजले श्रीरामकी वैराग्यपूर्ण स्थितिका वर्णन करना
  3. विश्वामित्र आदिकी प्रेरणासे राजा दशरथका श्रीरामको सभामें बुलाकर उनका मस्तक सूघना और मुनिके पूछनेपर श्रीरामका अपने विचार मूलक वैराग्यका कारण बताना

एकश्लोकी योगवासिष्ठ

एक बार भगवान् रामने महर्षि वसिष्ठने पूछा कि सार्थक एव मफक जीवनवाले मानवकी पहचान क्या है

इसके उत्तरमै रघुकुलगुरु ब्रह्मनिष्ठ ब्रह्मर्पि वसिष्ठने जो अल्पाक्षरा किंतु अर्थबहुला, एकश्लोकी वाणी, जिसमें बीजे वृक्षमिव’ सारा भ्योगवासिष्ठ’ भरा हुआ है,

समुच्चारित की थी, वह सचमुच गागरमें सागरकी तरह योगवामिष्ठका समग्र उपादेय तत्त्व निचोड़कर एक श्लोकमे भर देती है। महर्षि प्रवरकी अर्थ भारवती वह वाणी इस प्रकार है-

तरवोऽपि हि जीवन्ति जीवन्ति मृगपक्षिणः । स जीवति मनो यस्य मननेनोपजीवति ॥

योगवासिष्ठ

योगवासिष्ठकी श्रेष्ठता और समीचीनता

योगवासिष्ठ के अध्येता तथा मननकर्ताओंसे यह बात छिपी नहीं है कि यह ग्रन्थ भारत ही नहीं, विश्वसाहित्यमे ज्ञानात्मक, सूक्ष्मविचार-तत्त्वनिरूपक तथा श्रेष्ठ सदुक्तिपूर्ण ग्रन्थोंमें सर्व श्रेष्ठ है।

यह महारामायण, वासिष्ठरामायण आदि नामोंसे भी विख्यात है। स्वयं भगवान् वसिष्ठने ही कहा है कि ‘ससार सर्पके विषसे चिकल तथा विपयविषूचिकासे पीड़ित मृतप्राय प्राणियोंके लिये योगवासिष्ठ परम पवित्र अमोष गारुड़-मन्त्र है।

इसे सुन लेनेपर जीवन्मुक्ति सुखका अनुभव होता है। स्वामी | रामतीर्थ कहा करते थे कि ‘योगवासिष्ठ मेरे लिये सर्वाधिक आश्चर्य एवं चमत्कारपूर्ण ग्रन्थ है ।

डा० भगवानदासने ‘मिस्टिक एक्सपिरियन्सेन’ पुस्तककी प्रस्तावनामें लिखा है योगवासिष्ठ सिद्धावस्थाका ग्रन्थ है। इसके विचार, दर्शन, रहस्य, निरूपण-प्रणाली, भाषा, अलंकार – सब एक-से-एक आश्रर्यकर हैं।’

और पढ़े: Yoga Vasistha PDF In English, Yoga Vasistha PDF In Marathi

लेखक योग वशिष्ठ-Yog Vashishtha, वाल्मीकि-Valmiki
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 563
Pdf साइज़2.6 MB
Categoryधार्मिक(Religious)

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योग वासिष्ठ महारामायण 1,2,3,4 भाग

संक्षिप्त योगवासिष्ठ गीता प्रेस

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सर्ग 1

सर्ग 2 से 8

सर्ग 9 से 14

सर्ग 15 से 17

सर्ग 18 से 19

सर्ग 20 से 21

सर्ग 22 से 25

सर्ग 26 से 27

सर्ग 28 से 30

सर्ग 31 से 33

श्री योग वासिष्ठ महारामायण 1,2,3,4 भाग – Shri Yoga Vashishtha Maharamayan Book/Pustak PDF Free Download

2 thoughts on “श्री योग वासिष्ठ महारामायण | Yoga Vashishtha Maharamayan PDF In Hindi”

  1. I could download only Volume 1 and found it to be in excellent get-up and language.

    I wonder other volumes 2,3 and 4 are not available to download pl indicate. I would love to read it all. Regards

    1. धन्यवाद, अब हमने नए लिंक दे दिए है इससे आप बिना रुकावट डाउनलोड कर सकते हो

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