Sanskrit Book PDF

संस्कृत सूक्ति संग्रह | Sanskrit Sukti Sangrah PDF

संस्कृत सूक्ति संग्रह – Sanskrit Sukti Sangrah Book Pdf Free Download पुस्तक का एक मशीनी अंश इस संकलन में संस्कृत के पथ और गयदोनो का स्थान है । संस्कृत के कवि भिन्न-भिन्न प्रकार के चरितों के चित्रण, भिन्न भिन्न प्रकार के लोक-जीवन के आदर्शों के निरूपण, भिन्न-भिन्न प्रकार के मनोभावों के प्रकाशन-एक शब्द में, जीवन …

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धम्मपद | Dhammapada PDF In Hindi

धम्मपद संस्कृत – The Dhammapada Hindi Book Pdf Free Download धम्मपद संस्कृत श्लोक और हिंदी अर्थ सहित भगवान बुद्ध की अमर वाणी ‘धम्मपद’ का भाषानुवाद आपके समक्ष प्रस्तुत करते हुए हमें अपार हर्ष हो रहा है। विश्वभर के लोक प्रिय ग्रंथों में इसका बहुत ऊंचा स्थान है। विपश्यना के प्रचार-प्रसार के साथ-साथ इसकी लोक प्रियता …

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शिव स्तोत्रावली | Shiv Stotravali PDF

सम्पूर्ण शिव स्तोत्र संग्रह – Shiv Stotravali Sanskrit With Hindi Meaning Pdf Free Download स्तोत्रावली का अर्थ और संग्रह शिवस्तोत्रावली’, जैसे कि इस के नाम से ही सूचित होता है, संस्कृत – स्तोत्र-साहित्य की एक ऐसी अनूठी पुस्तक है, जिस में भगवान् शंकर की स्तुति के गीत गाये गये हैं। इस में अद्वैत-शैव- दर्शन के …

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सिद्धांत दर्शन | Siddhant Darshan PDF In Hindi

सिद्धांत दर्शनम – Siddhant Darshan Book/Pustak Pdf Free Download पुस्तक का एक मशीनी अंश अच मन्यक्सिद्धस्य द्विवीयस्यावास्र] ि पर्णनुयोग्ग हसचियोपरिष्ठात्समादयौ । पोदचादिषदार्थवप्तु व्यवहार. सौकर्यार्थों लौकायतिकपवोधार्यों सुदबुद्धीनां चियः श्रोचनेन सोपानवच्छ नैरेतन्यार्गारोदणार्थ् अत एव स्यृति:- मथमं स्थूलमारभ्य शनैः सौक्ष्म्यं विया नयेत् । स्थूले निर्जितपात्मानं कपार्मृक्ष्ये निवेशयषेत् । इति ।शास्त्रीयतन्निन्दा तु तेषां कल्पनामात्रमसूतत्वाच्छूतिविकुद्धांवतचाथ ।एव तर्द शस्य त्याज्यत्वमुक्तम् । …

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महेश्वर तंत्र | Maheshwara Tantra PDF

माहेश्वर तंत्रम – Maheshwara Tantra Book/Pustak Pdf Free Download पुस्तक का एक मशीनी अंश मवेव्क प्रक्षमद्षिवजित म ॥२५ ॥ सजातीववि जातीयमगतश्च श्च तुखाचने । बहत्ये स्रस्याप आनन्यो दिदिद रुास्यरक ॥२६ सदंशबीजमूका च मकृतिर्वे चरात्यमा । न तस्मासळीलायाः स्थितिः कूटस्थ ईपरे । मते परस्वाय निर्गुणस्वान्मे यरि ॥ २७ ॥ उच्चये पुरुषे पूर्ण झानन्दात्मनि केवले । कीा …

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ध्वन्यालोक | Dhvanyaloka PDF In Sanskrit

ध्वन्यालोक – Dhvanyaloka Book/Pustak Pdf Free Download पुस्तक का एक मशीनी अंश यो ही अर्थान् स्वयं अधिक से अंधा होने के कारण । “जन’ का अर्थ है लोक में प्रसिद्ध केवल गतानुगतिकता का महारा नेवा । उसका अमाधारण गुण- गणों से महनीय शरीरबाले का । ‘कपोल की उपमा में अति विमा यनायट के लावण्यसर्वस्वभून मुख …

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