डेसमंड टूटू: शांति के दूत | Desmond Tutu Hindi Biography

डेसमंड टूटू हिंदी अनुवाद | Desmond Tutu Biography Book/Pustak PDF Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

नोबल पुरुस्कार मिलने के बाद प्रेस कांफ्रेंस में डॅस्मंड टूटू ने कहा, “यह नोबल पुरुस्कार दुनिया का ध्यान दक्षिण अफ्रीका की रंगभेद समस्या पर केन्द्रित करेगा.”

धरमाध्यक्ष बिशप डेस्मंड टूटू को पता था कि 1984 के दिसम्बर में ओस्लो, नॉर्वे में कड़ाके की ठंड होगी. पर उन्हें इस बात का कोई आभास नहीं था कि उन्हें और उनके मेजबानों को हाल के बाहर कड़कड़ाती ठंड में डेढ़ घंटे खड़े रहना पड़ेगा.

डेस्मंड नोबल पुरस्कार लेने के लिए इस हाल में नॉर्वे आए थे. फिर आखरी मौके पर पुलिस को एक बम्ब की धमकी मिली. किसी ने हाल और बिशप टूटू को उड़ा देने की धमकी दी थी.

“इससे यह साफ़ ज़ाहिर होता है कि हमारे दुश्मन कितने मायूस और निराश है,” बिशप टूटू ने कहा. पुलिस ने हाल का चप्पा-चप्पा छान मारा. उन्हें कोई बम्ब नहीं मिला.

उसके बाद सभी लोग वापिस हाल में गए और बिशप टूटू को शांति का नोबल पुरुस्कार दिया गया. बिशप टूटू खुश थे. पर वो दुखी भी थे. “दक्षिण अफ्रीका में कोई शांति नहीं है,” उन्होंने कहा, “क्योंकि वहां कोई न्याय नहीं है.”

बिशप टूटू ने दक्षिण अफ्रीका में न्याय और शांति के लिए बरसों काम किया था. अपने इस अनूठे काम के लिए उन्हें दुनिया भर की यूनिवर्सिटीज पुरस्कारों और मानद डिग्रियों से नवाज़ा था. पर अभी भी कितना काम करने को बाकी पड़ा था.

डेस्मंड म्पिलो टूटू का जन्म 7 अक्टूबर, 1931 हुआ था. उनके पिता ज़कारिया, मेथोडिस्ट स्कूल में में पढ़ाते थे. उनकी माँ अलेल्टा एक घर में नौकरानी थीं. उनका परिवार किर्क्सडोर्प में था. वो ट्रांसवाल, दक्षिण अफ्रीका में एक सोने की खदान के पास था.

शिशु अवस्था में डेस्मंड बहुत कमज़ोर थे. परिवार को लगा वो चल न बसें. इसलिए उनकी दादी ने उन्हें एक विशेष नाम दिया “म्पिलो”. बन्टू भाषा में उसका मतलब होता है “जीवन”. डेस्मंड जीवित रहे.

लेखक कैरोल-Kairol
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 30
PDF साइज़1.2 MB
Categoryआत्मकथा(Biography)

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