योग एवं भक्ति | Yog Evm Bhakti

योग एवं भक्ति | Yog Evm Bhakti Book/Pustak PDF Free Download

मन्त्र सिद्धिका अद्भुत चमत्कार

बिरला हाउस, नयी दिल्लीसे मास्टर श्रीरामजी लिखते हैं

दिल्ली में अनुमान दो-ढाई माससे एक वैष्णव साधु आये हुए थे, जिनका नाम बाबा गोपालदास है। वे यहाँपर आर्यनिवास नं० १, डाक्टर लेन पर ठहरे थे।

छतके ऊपर एक गोल-सा छोटा कमरा है, उसीमें वे रहते थे। उन्होंने गोपालका एक चित्र काष्ठकी चौकीपर रख छोड़ा था। उस चित्रके चारों तरफ कनेरके पुष्प चढ़ाये हुए रक्खे रहते थे।

गोपालदास बाबा उस चौकीके पास ही एक दरीपर बैठे तुलसीकी माला फेरते थे। जो लोग उनके पास जाते, वे भी उसी दरीपर बैठ जाते थे। उनके पास जानेवालोंको प्रसाद देनेके लिये

बाबाजी ईंटके छोटे छोटे टुकड़े अनुमान ४, ५ तोले वजनके एक हरे केलेके टुकड़ेमें गोपालकी मूर्तिके सामने आधा मिनट रखकर उठा लेते थे, तो ईंटके टुकड़े सफेद मिश्रीके टुकड़ोंमें बदल जाते थे

और वे इन मिश्रीके टुकड़ोंको उन लोगोंको दे देते थे, जो उनके दर्शनके लिये जाते। कभी-कभी ईंटका टुकड़ा कलाकंदमें बदल जाता था। यह अद्भुत परिवर्तन कैसे हो जाता है?

सो तो वह बाबाजी ही जानते हैं, और किसीको पता चला नहीं है। विज्ञानवेत्ता इस कारणको ढूँढ निकालें तो दूसरी बात है। उक्त बाबाजीके पास जर्मन राजदूत, जापानी राजदूत (संसदके अध्यक्ष श्रीमावलङ्कर,

श्रीसत्यनारायण सिंह, रायबहादुर लक्ष्मीकान्त मिश्र आदि गये थे। इनको भी इसी प्रकारका प्रसाद दिया गया था। जर्मन राजदूतके साथ एक जर्मन महाशय भी थे।

उन्होंने तो यह चमत्कार देखकर बाबाजीसे अपना शिष्य बना लेनेकी प्रार्थना इन दो प्रकार के चमत्कारों के अतिरिक्त तीन चमत्कार विशेष उल्लेखनीय हैं।

पहला चमत्कार तो यह है कि बीजुगलकिशोरजी बिरलाने एक तबिकी चमचोको एक केके हरे पत्तेमें लपेटकर उन्होंने गोपालका एक चित्र काष्ठकी चौकीपर रख छोड़ा था।

लेखक हनुमान प्रसाद-Hanuman Prasad
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 166
Pdf साइज़403.3 KB
Categoryस्वास्थ्य(Health)

योग एवं भक्ति | Yog Evm Bhakti Book/Pustak PDF Free Download

Leave a Comment

Your email address will not be published.