गोमांतक | Gomantak

गोमांतक | Gomantak Book/Pustak Pdf Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

दुकान के सामने आवारा यचों के शोर ने सेठजी कोवित हो उठते, किन्तु उनके बंडा उठाकर अपनी विशाल देह को अपने पैरों पर सम्मालने से पहले ही वे बच्चे चम्पत हो जाते ।

प्रात:काल गौओं को सेकर ग्वाले जंगल की ओर निकलते । अपनी गाय भेजने में श्यामजी पंडित हमेशा हो देर करते । तब बे ग्बाल-बाल पंडितणी को तंग करने के लिए उनसे सू जाते, जिससे पंडितजी को फिर से स्नान करने शुद्ध होना पड़ता ।

हर साल पड़ोस के गाँव में मेला लगता और दंगल होता । मार्गव गाँव का कोई कोई जवान भी उसमें खम ठोक कर उतरता । जाते समय माँ के चरण स्पर्श करता ।

माता उसे आशीप देते समय कहती, होशियार रहना बेटा और जीत कर आना । तब बह आत्म-विश्वास से मुस्कराकर मूंछों पर हल्का-सा हाथ फेरता । माँ का प्राशीप कमी व्यर्थ नहीं जाता ।

वह अपने से दुगुने जवान की पीठ लगाकर लौटता । उसी विषयी वीर के स्वागत के लिए तथा उसके सिर पर पगड़ी बांधने के लिए गाँव की सीमा पर सब स्त्री पुरुषों की नीड़ इकट्टी हो जाती।

जवारों से ग्राकाच गूंज उठता जार बह अवान छाती तान कर ऐसी शान से डोलता हुआ एक-एक कवम उठाता पागे बढ़ता मानो रावण को मारकर राम ही अयोध्या को लौट रहा हो।

गाँव के सभी झगड़े पंचायत में निपट जाते प्रर गाँव का पटेल गांव की रक्षा के लिए सदा सतबद्ध स्हृता । गाँव के पंडितजी सनी ग्रामीण जनों को उनके धर्म-कर्म, की शिक्षा दिया करते इस प्रकार देवी गौर भौतिक संकटों के परिहार की व्यवस् होने

कारण किसान निश्चितता से अपनी खेती करते । हरे-मरे खेतों पर लहलहाने वाली अनाज की सुनहरी वालें ऐसी लगतीं जैसे शरीर के भीतर प्राण । उन्हें देखकर घर-घर में सन्तोप फील जाता ।

लेखक विनायक दामोदर सावरकर-Vinayak Damodar Savarkar
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 141
Pdf साइज़4.8 MB
Categoryउपन्यास(Novel)

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