अंतर्ज्वाला | Antarjwala

अंतर्ज्वाला | Antarjwala Book/Pustak Pdf Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

अपना जम्मसिग्र प्रकार सममती हैं, वे ही बाज अपने हाग साविकत विज्ञान के मातम यंत्रों से नातवकुल फी याई नष्ट हो रही है । आँखों की एक समय में ही वड़़े-धरे साध्रान्य माशों से बने घरों की तरह चित्र- त्रिकम हो रहे हैं, ।

सम्या के इमाम फेन्त्र राग्य के हीरो में परिणाम हो चुके हैं । कहता के सुंदर नमूने साकाश से चरसवी आग में घांद घांय बरके गल रहे हैं । पश्चिम का सुसंस्कृत मनुष्य श्रीजी सिन्हा वबग’ होग गा हैं कि वरने बूढ़े और बीमार भी उतके निशाने से नहीं बच सकते ।

विश्व को सभ्यता का पाठ सिखाने वाले छात्र आलू में मौत से बचने के लिये धरती मासा में गुफायें बनाकर जिस फिली प्रकार अपने प्राशह को रक्षा कर रहे हैं। एक और अक्षां रगाचरी का यहमीगयानुत्य हो रहा है,

सरी योर अपने ही देश में गृहयुद्ध की तपटे हमें भयभीत पन्ना रही हैं । अन्दरराष्ट्रीय परिस्थिति से अनुचित लाम उठा कर पाकिस्तानियों के भुरह के ुशड श्रा च देश के एक सिरे से दूसरे मिरे तक जीशीनी बक्तताओं द्वारा खरकार और तिदुओों को धमकाते हुए कहा है

हमारी शतं मान लो बना पछ्याना पढ़ेगा ! मद्राम में हुप सुमल्तिम खोग के शामिोशन में अध्यक्ष पद से भाषण देते हुए मिट किशा ने कड़ा है –“दम ज्ञानना चाहते हैं कि हमें पाकिस्तान ब्रिटिश सरकार कनी अववा किनी दुरी शक्ि की सहायता से लेना पढ़ेंगा ?”

नयामकादा लिंयाकतायह्वीयां ने यभ्यई में भापण देते हुए कहा है -“अपने पर्शकिश्ठान न दिया गया तो हिन्दुरतान के ल्ोगों को हिन्दुम्वान के मुसलमानों से दो प्रकार का मय सहा बना रहेगा । आन्यरिक सशाम्वि गौर सीमावती मुसलिम राज्यों के मेत से ‘पान इम्त मिल की स्थापना ।

लेखक वीर सावरकर-Veer Savarkar
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 165
Pdf साइज़7 MB
Categoryइतिहास(History)

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