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श्री गुरु ग्रंथ साहिब – Guru Granth Sahib PDF Free Download

श्री गुरु ग्रंथ साहिब
नानक की प्रभ बेनती प्रभ मिलहु परापति होइ ॥ वैसाबु सुहावा तां लगै जा संतु भेटै हरि सोइ ॥ ३॥ हरि जेठि जुडंदा लोड़ीऐ जिसु अगै सभि निवंनि ॥ हरि सजण दावणि लगिआ किसै न देई बंनि ॥
माणक मोती नामु प्रभ उन लगै नाही संनि ॥ रंग सभे नाराइणे जेते मनि भावंनि ॥ जो हरि लोड़े सो करे सोई जी करंनि ॥ जो प्रभि कीते आपणे सेई कहीअहि धंनि ॥
आपण लीआ जे मिले विछुड़ि किउ रोवंनि ॥ साधू संगु परापते नानक रंग माणंनि ॥ हरि जेठु रंगीला तिसु धणी जिस के भागु मनि ॥४॥ आसाङ्ड तपंदा तेरे लगै हरि नाहु न जिंना पासि ॥
जगजीवन पुरखु तिआगि के ं माणस संदी आस ॥ दुयै भाइ विगुचीऐ गलि पईसु जम की फास ॥ जेहा बीजै सो लुणे मथै जो लिखिआसु ॥ रैणि विहाणी पछुताणी उठि चली गई निरास ॥
जिन को साधू भेटीऐ सो दरगह होइ खलासु ॥ करि किरपा प्रभ आपणी तेरे दरसन होइ पिआस ॥ प्रभ तुधु बिनु दूजा को नही नानक की अरदासि ॥ आसाड सुहंदा तिसु लगै जिसु मनि हरि चरण निवास ॥५॥
सावणि सरसी कामणी चरन कमल सिउ पिआरु ॥ मनु तनु रता सच रंगि इको नामु अधारु ॥ बिखिआ रंग कूड़ाविआ दिसनि सभे छारु ॥ हरि अमृत बूंद सुहावणी मिलि साधू पीवणहारु ॥
वणु तिणु प्रभ मंगि मउलिआ समथ पुरख अपार ॥ हरि मिलणै नो मनु लोचदा करमि मिलावणहारु ॥ जिनी सखीए प्रभु पाइआ हंउ तिन के सद बलिहार ॥ नानक हरि जी मइआ करि सबदि सवारणहारु ॥
सावणु तिना सुहागन जिन राम नामु उरि हारु ॥६॥ भादुइ भरमि भुलाणीआ दूजै लगा हेतु ॥ लख सीगार बनाइए कारजि नाही केतु ॥ जितु दिनि देह बिनससी तितु वेलै कहसनि प्रेतु ॥
पकड़ि चलाइनि * दूत जम किसे न देनी भेतु ॥ छडि खड़ोते खिनै माहि जिन सिउ लगा हेतु ॥ हथ मरोई तनु कपे सिआहहु होआ सेतु ॥ जेहा बीजै सो लुणै करमा संदड़ा खेतु ॥
लेखक | गुरु ग्रंथ साहिब-Guru Granth Sahib |
भाषा | हिन्दी |
कुल पृष्ठ | 1492 |
Pdf साइज़ | 7.2 MB |
Category | धार्मिक(Religious) |
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