श्री सतगुरु ग्रन्थ साहिब | Shri Satguru Granth Sahib

श्री सतगुरु ग्रन्थ साहिब | Shri Satguru Granth Sahib Book/Pustak Pdf Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

“श्री सतगुरु ग्रन्थ साहिब” की शोध में सतगुरु भूरी वालों के द्वारा हस्त लिखित ग्रन्थ साहिब की प्रतिलिपि की गई है जो कि बड़ी सावधानी से काम किया गया है

फिर भी तुच्छ बुद्धि जीव होने के कारण त्रुटियां रह सकती है। अतः पहले तो बन्दी छोड़ कबीर साहेब जी, बन्दी छोड आचार्य गरीब दास जी, सतगुरु ब्रह्मसागर जी भूरी वालों के चरणों में प्रार्थना करता हूँ

वे हर प्रकार की अनजाने में जो गलती हो गई है या रह गई है उसके लिए क्षमा करें और भेष भूषण सन्तो, विद्वानों, महापुरुषों से भी अशुद्धियों की क्षमा याचना करता हूँ।

विद्वत् पाठक वृन्द से भी विनती करता हूँ कि वे अक्षरों की गलती को सुधार कर पाठ करें। श्री स्वामी जैयत राम जी महाराज श्री गरीबदास जी के पुत्र एवं शिष्य थे।

महाराज श्री ने इन्हें अपने पैतृक गांव करौंथा जिला रोहतक (हरियाणा) की गद्दी पर बैठा दिया था। ये स्वतन्त्र प्रवृत्ति के फक्कड़द सन्त थे। इन्होंने जल्दी ही संन्यास धारण करके विरक्त हो कर भ्रमण करना शुरु कर दिया था।

इन्होंने महत पुर, जिला-जालन्चर में इस नश्वर शरीर का त्याग किया जहाँ इनकी समाधि सुरक्षित है। श्री जैयत राम जी ने भी वाणी की रचना की है। इनकी वाणी को महाराज श्री की वाणी की चाबी कहा जाता है।

इन्होंने अपने पिता एवं गुरु आचार्य गरीबदास जी महाराज की जीवनी पर भी प्रकाश डाला है। महामण्डलेश्वर श्री स्वामी दयालु दास जी महाराज गरीबदासी भेष के प्रथम प्रचारक हुए।

इन्होंने भारत भूमि के विभिन्न भागों में अपनी शिष्य मण्डली के साथ भ्रमण करते हुए महाराज श्री की वाणी का प्रचार-प्रसार किया। ये आचार्य जी की वाणी को ही सर्वोपरि मानते थे।

लेखक गरीबदास साहिब-Garibdas Sahib
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 996
Pdf साइज़4.9 MB
Categoryधार्मिक(Religious)

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