गुरु ग्रंथ प्रदीप | Guru Granth Pradip

गुरु ग्रंथ प्रदीप | Guru Granth Pradip Book/Pustak Pdf Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

जाननेसे यथार्थ उच्चारणं नहीं होगा इस वास्ते नागरी वों में व्याख्यान करना योग्यहै और एक इसमें दूसरा भी कारण है सो कारणभी सर्वको अवश्य ज्ञातव्यहे सो यहहै

जोकि इसव्याख्यानसे. सर्वदेशनियासी गुरुपुली यों के न जाननेवालोंकोभी इसव्याख्यानके पठन श्र वणविचारसे परमानन्दस्वरुपरस की प्राप्ति होगी क्यों कि श्रीगुरुजीका अवतार

कलिकालके सर्वप्रकारके जी – वोंके उद्धार करनेवास्तेहै ॥ जेकर सर्व का उपकारकन्या ख्यान नहींकरेंगे तगुरुपुसी अक्षरों में एकदेशी व्या ख्यानसे चित्तप्रसन्न नहीं होवेगा जैसे कोई

धर्माल्मापु- रुप वावली कूप तलाववनयाताहै तब वह संकल्पकरता है कि इसकेजलको सर्वजीव पानकरें और अपनी प्यास कोबुझाकर शान्तहो इसीप्रकार श्रीगुरुजीकी प्रेरणा से मेरेमनमें संकल्पहै

इसव्याख्यानसे सर्वको परमेश्वर की भक्निरूप महारस की प्रापिहोवे इस पूर्वउक्त प्रतिज्ञासे यहकथनभी निरस्तजानना कि गुरुयन्धजी का व्या- ख्यान नहीं करनाचाहिये क्योंकि गुरुमहाराजजी का आशय वहुतगुह्यहै

जहांतक किसीकी बुद्धि है वहांतक समझलेवेगा। परन्तु यह कथन अल्पश्रुतों का है क्यों कि जहांतक हमारी प्रज्ञाहै वहांतक हम भी व्याख्यान करेंगे यदि किसीको इससे अधिकफुरे तवभी क्या हानि है

जहांतक आकाशमें पक्षीकी शक्तिहे तहाँ तक गमन करेगा॥ इसीप्रकार यदि किसीकी वहुतशक्गिहोवें तब ज्यादा अर्थ करो सर्वथा व्याख्यानका निषेधकरना अ नुचितहै देखनाचाहिये जितने प्रन्य हैं

तिनसर्वपरही न्यू न अथवा अधिक व्याख्यान विद्यमान हैं तब तो न्थपर व्याख्यानकरने में क्या अपराध है प्रत्युत ग्रन्थजी पर व्याख्यानहोने से बहुतजल्दी ग्रन्थजीका अर्थ हृदय में प्रकाशितहोवेगा

जवशीघ्रही अर्थ का प्रकाशहुआ तंब श्रीगुरुजीका जो संकल्पहै कि जिसकिस प्रकारसे इन जीवोंको भक्निज्ञान वैराग्यादिक प्राप्तहोवें तैसे यत्न करन। चाहिये, इससंकल्पकी दृढ़ता गुरुग्रन्थके व्याख्यान से ही होवेगी,

इसवास्ते ग्रन्थजीका व्याख्यान गुरुमुखी वा नागरी अवश्य कर्तव्यहै। श्रीगुरुजीने कलिकाल के जीवों को अल्पबुद्धि और अल्प आयु जानकर बहुत स्व वैदिक रीति अनुसरण करीहै ॥

जैसी देशमापा मोटी बोली बोलचाल में आव तीहै तिसीप्रकारकी बोली में फ्र्मगप्मीर अर्थका उपदे श कियाहै इनी वास्ते कहीं कहीं जिला जिला अधिकारी गुरुजी की शरण आया है

लेखक
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 354
Pdf साइज़19 MB
Categoryसाहित्य(Literature)

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