श्री तारकेश्वरनाथ शिव चालीसा | Shri Tarkeshwarnath Shiv Chalisa

श्री तारकेश्वरनाथ शिव चालीसा | Shri Tarkeshwarnath Shiv Chalisa Book/Pustak Pdf Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

म्हारी सेवा भोला स्वीकारो। सेवा में कोई भूल हुई,गुनाह माफ करो म्हारो मैं सेवक हूँ भोला थारी, सेवा में कोई भूल हुई,विधि विधान, ज्ञान नहीं मोहे सेवा कर लीनी। मन्त्र, तन्त्र, बिन, भोग लगा थाकी आरती भी कीनी ॥

बांका चरणा में ही ध्यान राखण्यो, अरजी सुणी म्हारी।पार लगायी जब धाम बुलाओ, भोला भंडारी ॥ मुने एक थाको ही सहारा । सेवा में कोई भूल हुई काई अरज करू थाने सब जाणी त्रिपुरारी।

बात जायली थाकी है ” शिव-शक्ति । महतारी ।।मन चायो फल थे दे डारो। सेवा में कोई भूल हुई , * शिव की शृंगार स्तुति कैसो अद्भुत रूप धर्यो है जी, बाबा बागम्बर धारी। “शिव-शक्ति”

मणी मोत्या रो मुकुट सजायो जी, केसर तिलक त्रिपुंड लगायो जी। कैसी शोभित हो रही है या देखो चन्द्रवी न्यारी ।।कैसो अद्भुत रूप धर्यो. गल में नागराज फणधारी जी, रुद्राक्ष की माला है भारी जी।

पन्ना मोती, जड़ित ये कुण्डल चाकी कर्ण छवि प्यारी ।कैसो अद्भुत रूप धरयो. कर में त्रिशुल, डमरू सोहे जी. गणपति कार्तिक जी मन मोहे जी! रहती संग में सदा भवानी जी बाबा भोला भण्डारी

कैसी अद्भुत रूप धरा दरशण काया जो भी आवजी पथ सागर से वो तीरजा जी। में भी शाण पडयो ह घाट शिव तारक जो तिमुरारो।।कसो अदभुत काप धरओ.वस्त्र खाल बाभम्यर सोहें। छवि को देखि नागमुनि मौहें ॥

मैना मातु कि हवे दुलारी। वाम अंग सोहत छवि न्यारी॥ कर त्रिशूल सोहत छवि भारी। करत सदा शत्रुन् क्षयकारी । मन्दि गणेश सो तह कैसे सागर मध्य कमल हैं जैसे ॥ कार्तिक श्याम और गणराऊ। या छवि को कहि जात न काऊ॥

लेखक गुलाब जोशी-Gulab Joshi
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 50
Pdf साइज़7 MB
Categoryकाव्य(Poetry)

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