षोडशी महाविद्या | Shodashi Mahavidya

षोडशी महाविद्या | Shodashi Mahavidya Book/Pustak Pdf Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

अनन्त कोटि ब्रह्माण्ड जननी, अनन्त कल्याणमयी भगवती पराम्बा ही इस सम्पूर्ण विश्व का उपादान और अधिष्ठान है। यह विश्व उन्हीं से परिव्याप्त है।

भगवती राजराजेश्वरी दश महाविद्याओं में से एक है, जो भोग और मोक्ष दोनों ही प्रदान करने वाली है। यही इस विश्व की जननी हैं। सम्पूर्ण जगत की गतिविधियाँ इन्हीं देवी से नियंत्रित और संचालित हैं।

यही शक्ति, महाशक्ति, पराशक्ति, चित्त-शक्ति, चैतन्य शक्ति आदि अनेक नामों से विवेचित हुई हैं। इन्हीं शक्ति की महिमा सर्वोपरि प्रतिष्ठित है। वे ही परमशक्ति हैं और शिव सहित सभी देव उनसे अपनी शक्ति प्राप्त करते हैं।

शक्ति सक्रियता का प्रतीक है। शाक्त सम्प्रदाय के अनुसार ‘शिव’ में जो इकार है, वह शक्ति का प्रतीक है, जिसके बिना ‘शिव’ भी ‘शव’ के समान निष्क्रिय हो जाते हैं, इसलिये शिव और शक्ति को अभिन्न माना गया है।

“न शिवेन विना शक्तिर्न शक्तिरहितः शिवः” कौलज्ञान निर्णय के इस श्लोक से भी यही सिद्ध होता है। वस्तुतः महाशक्ति ही परब्रह्म परमात्मा हैं, जो विभिन्न रूपों में विविध लीलायें करती हैं,

इन्हीं की शक्ति से ब्रह्मा विश्व की उत्पत्ति करते हैं, विष्णु विश्व का पालन करते हैं और इन्हों की शक्ति से शिव जगत का संहार करते हैं। अर्थात् ये ही सृजन, पालन और संहार करने वाली आद्याशक्ति हैं।

ये ही शक्तिमान् और ये ही शक्ति हैं। समस्त विश्व महाशक्ति का ही विलास है। भगवती स्वयं कहती हैं सर्वं खल्विदमेवाह नान्यदस्ति सनातनम्” अर्थात् समस्त विश्व मैं ही हूँ।

मुझसे अतिरिक्त दूसरा कोई भी सनातन या अविनाशी तत्व नहीं है। भगवतो त्रिपुरा की उपासना से सद्यः फल की प्राप्ति होती है। माँ राजराजेश्वरी अपने भक्तों वाली आद्याशक्ति हैं।

लेखक योगेश्वरानंद-Yogeshwaranand
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 26
Pdf साइज़14.7 MB
Categoryधार्मिक(Religious)

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