व्यक्तित्व परिष्कार की साधना | Vyaktitva Parishkar Ki Sadhna Hindi PDF

व्यक्तित्व परिष्कार की साधना | Vyaktitva Parishkar Ki Sadhna Book/Pustak PDF Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

आत्मबोध की साधना

प्रातः आँख खुलते ही यह साधना की जाती है। रात्रि में नींद आते ही यह दृश्य जगत समाप्त हो जाता है। मनुष्य स्वप्न- सुषुप्ति के किसी अन्य जगत में रहता है।

इस जगत में पड़े हुए स्थूल शरीर से उसका सम्पर्क नाम मात्र का काम चलाऊ भर रह जाता है। जागते ही चेतना का शरीर से सघन सम्पर्क बनता है, यह नये जन्म जैसी स्थिति होती है ।

जागते ही पालथी मार कर बैठ जायें, ठंडक हो तो वस्त्र ओढ़े रहें। दोनों हाथ गोदी में रखें, सर्वप्रथम लम्बी श्वांस लें, नील वर्ण प्रकाश का ध्यान करें, नाक से ही श्वांस छोड़े,

दूसरी श्वांस में पीले प्रकाश का ध्यान करते हुए पूर्ववत् क्रिया दोहरायें, तीसरी बार फिर रक्तवर्ण प्रकाश का ध्यान करते हुये गहरी श्वांस खींचें, धीरे धीरे नाक से ही श्वांसछोड़ दें ।

स्वस्थ प्रसन्नचित हो अनुभव करें कि परमात्मा ने कृपा करके हमें आज नया जन्म दिया है। इसकी अवधि पुनः निद्रा की गोद में जाने तक की है। दाता देख रहा है कि उनका यह पुत्र इस जीवन का कैसा उपयोग करता है ?

हम उसके प्रिय पुत्र है- नैष्ठिक साधक है, उसकी योजना के अनुसार ऐसा जीकर दिखायेंगे कि उसकी आँखें प्रसन्नता से चमक उठें। इस स्तर का सार्थक जीवन जीना तभी संभव है,

जब अपने अधिकार में आये शरीर, इन्द्रियों, मन बुद्धि, भावना, क्रिया, समय सबको परमात्मा के अनुशासन में बांधकर रखा जाय। इन्हें अनुशासनबद्ध रखने योग्य शक्ति भी उसी नियन्ता से प्राप्त होगी,

किन्तु उसके लिए मात्र कल्पना स्तर का चिन्तन पर्याप्त नहीं, उसे संकल्प, उमंग, उत्कंठा स्तर का बनाना होता है ।आज के नये जन्म के लिए भगवान का आभार मानते हुए

लेखक श्री राम शर्मा-Shri Ram Sharma
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 18
Pdf साइज़8 MB
CategoryReligious

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