श्री यंत्र साधना 131 दुर्लभ यंत्रो का अनुपम संग्रह | Yantra Sadhana PDF

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यंत्र एवं उनकी प्रयोग विधि

  1. श्री गणेश यन्त्र (धारण)
  2. देह-रक्षा यन्त्र (पन्द्रह)
  3. शिव-शक्ति बीसा यन्त्र
  4. गोपाल यन्त्र
  5. गीता यन्त्र
  6. ब्रह्म गायत्री यन्त्र (पूजन), कन्या के शीघ्र विवाह हेतु तन्त्र
  7. अनंग यन्त्र (धारण)
  8. भगवद्-कृपा यन्त्र
  9. श्रीराम यन्त्र (षड्वर्णात्मक), कन्या के शीघ्र विवाह हेतु तन्त्र ज्येष्ठा लक्ष्मी पूजन-यन्त्र
  10. शक्र वेश्म यन्त्र (त्रैलोक्य मोहिनी लक्ष्मी प्रयोग)
  11. वसुधा लक्ष्मी पूजन-यन्त्र, स्थानान्तरण हेतु तन्त्र
  12. लक्ष्मी बीसा यन्त्र
  13. लक्ष्मी प्राप्ति यन्त्र
  14. श्री दुर्गा नवार्ण बीसा यन्त्र
  15. शूलिनी दुर्गा यन्त्र (पूजन)
  16. श्री दुर्गा यन्त्र (धारण)
  17. दुगां यन्त्र (पूजन)
  18. दुर्गा सप्तशती यन्त्र (शतचण्डी प्रयोग)

………..आदि १३१ यंत्रो

या स्थन केवल रेखांकन मात्र ही है बल्कि उसमें निक सथ भी सन्निहित है। इनमें कक्षा मन्त्र रेखा प्रधान ९. एस आवृत्ति प्रान और संय प्रान होते हैं कुछ यन्तों में देवी देवताओं के मन्त्रो के बीजाक्षर भी होते हैं।

अन्य सायनानों के माध्यम से शातिता रत की प्रात्ति के लिए अधिक तगय तथा परिवार की आवश्यकता होती है, कि वना सापना भवसे अधिक सरन विधि है।

तन्त्रानुसार यन्त्र में यमनकारिक दिव्य शझिावों का समावेश देता है। इनकी रक्षा पंदी, तोवा, पीतल, स्पटिक अक्या स्वर्ण पर्षों पर कराई जाती है। भाजपा पर भी इनका निर्माण किया जाता है।

ये सभी पदार्थ कार्मिक र करने और गरम करने की समता रखते है गाय अचा यन्त्र स्फटिक या मया जाता है।

परन्तु स्मरण रखें कि यग्य अपना कार्य तभी करते हैं जब इनका निर्माण पूर्ण शुधिता, ला, विश्वाला, पूर्ण गनीयोग और निश्चित विधि विधान के साथ किया गया हो।

तो व् की चिपय सागर करल कहता है परन्तु सिर में केकत इतही कहा जा सवाता है कि जिस पन का शाप करने पर न या करने का जबरा जाता है,

उसी प्रकार या आधुनिक मशीन के समाना शीता में कार्य करने वाले रेखादिव तया उनमें अंकित सकलापों तथा उ्यो के संयोजन को पच्चा कहा जाता है।

डिनिन्न रेखजे, कंप्पो विभुट सतुपुंज, पामुण, इलाकार, आटा तवा लिन आदि को भरा ज्यामिति माता का निर्माण ही य्त्र ना कहता है।

यदि समय यो पनि कै। धरन्नु मन्द संतया रेवी देक्तवी है का संचोतन इन आाकृतियों में कर देने में एक अजय की भनकारी मिलतालिका में भर काली रे ।

वी रक्ति किनी पनिर पन्य अच्या मशीन की भाग मानक हित मत का मापन पन जाती ।। बाकी ग्वना सामान की जाती है यामहाराषमा म निधि आम का गम खान पर बार। समाज मान्य उपचारकाला की

लेखक योगेश्वरानंद-Yogeshwaranand
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 15
Pdf साइज़2.3 MB
Categoryज्योतिष(Astrology)

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