विचित्र रामायण ऑडिया | Vichitra Ramayana

विचित्र रामायण ऑडिया | Vichitra Ramayana Book/Pustak PDF Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

यह सुनकर जनक ने पूछा, हे सुन्दरि ! बताओ। किस प्रकार से हमें कन्या प्राप्त होगी ? राजा की बात सुनकर अप्सरा मेनका बोली हे ब्रह्मचारी (ब्रह्म में विचरण करनेवाले योगी)! सुनो,

में समस्त वृत्तान्त कह रही है । २ नाम का एक राजा था । प्राचीन काल में पृथ्वीतल पर कुशध्वज उसके वेदवती नामक एक कन्या हुई । ३ वह अत्यन्त सुन्दरी थी ।

ऐसा लगता था मानों स्वर्ग की युवती हो। उसके मनोहर रूप को देखकर योगीजन भी विचलित हो जाते थे । ४ उसके अनुरूप सुन्दर वर नहीं प्राप्त हो सका । विषण्णमना कन्या घोर तपस्या में लीन हो गई ।

उसने मन में संकल्प किया कि विष्णु ही मेरे पति बनें । वह निद्रा तथा भोजन का त्याग करके न जाने कितने काल पर्यन्त तपस्या करती रही । ६ इसी समय दिग्विजय के उपरान्त लोटते हुए संकेश्वर दशानन ने उस श्रेष्ठ रमणी को देखा ।

शीघ्रता से अन्तरिक्ष से यहाँ आकर उसने अपना यान रोक दिया तथा काम के वशीभूत होकर उससे रतिदान का आग्रह ताहा शुण विश्रवा बत्सि ।। १६ ।। किया ८ हो गई। तब मना करने पर भी रावण ने जबर्दस्ती उसे पकड़ लिया ।

प्रगाढ़ आलिंगन करके मुख का चुम्बन करते समय कुपित होकर रमणीमणि ने “छोड़ दे, छोड़ दे” इस प्रकार कहा । १० छोड़ देने पर रावण से वेदवती ने कहा, अरे असुर होकर तूने मेरी शुद्ध काया को अपवित कर दिया ।

ऐसा कहते-कहते क्रोध से प्रबल अग्नि प्रज्वलित हो उठी । मेरे कारण तेरा नाश होगा, ऐसा कहते हुए उसने प्राण छोड़ दिये । १२ अत्यन्त भयभीत होकर रावण वहां से चला गया और अपने लका-दुर्ग में जा पहुँचा ।

लेखक विश्वनाथ खुंटिया-Vishwanath Khuntia
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 686
Pdf साइज़13.8 MB
Categoryधार्मिक(Religious)

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