स्वप्नवासवदत्ता नाटक | Svapnavasavadattam Natak PDF

स्वप्नवासवदत्तम् नाटक – Swapnavasavdatta Natak Book/Pustak Pdf Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

पासवपत्ता-विवाह प्रामोव संकुलित अन्त:पुर के प्राङ्गण में पद्मावती को छोड़कर में यहाँ प्रमदवन में आयी हूँ। इसलिये कि यहाँ आकर मैं अपने दुर्भाग्य जनित दुखों को दूर करुंगी। (धूमकर ) यह तो बड़ी अनहोनी हो गई।

आर्य पुत्र भी पराये हो गये (बैठकर) अच्छा, मैं भी बैठती हूँ। बह चकवार अचू घन्य है जो अपने स्वामी से चिरविवुक्त होकर प्राण परित्याग कर देती है परन्तु मुझे मृत्यु भी नहीं आती। आय्य पुत्र के दर्शनों की अभिलाषा से यह मन्वभागया अब तक प्राण धारण किये हुये है।

(फूल लिये हुए चेटी का प्रवेश )चेटी-बा- अवन्तिका कहाँ चली गई (घूमकर और देखकर) अरे ! यह तो चिन्ता मग्न एवम् शून्य हदय के समान प्रिंयगु लता के शिला पट पर समासीन हैं। इनफा आभरण शून्यवेप ऐसा मालूम होता है। कि मानो तुषार-मंडित मूलांक मूर्ति ही हो।

अच्छा तो अब मैं उनके पास जाती हूँ। (पास जाकर) श्रादये ! अवन्तिके ! मैं कितनी देर से तुम्हें ढूंद रही हूँ। वासवदत्ता-क्या काम है ? चेटी-महारानी ने कहा है कि आप विशालकुल सम्भवा स्नेह बती एवम् अत्यन्त निपुण हैं,

इसलिये आप ही इस कौतुक भाला को गुथ दें। वासवदत्ता–किसके लिये गँध ? चेटी-हमारी राजनन्दिनी के लिये । वासवदत्ता-(भगत ) अरे, यह भी मुझे करना पड़ेगा । आई, देव बड़ा निर्दई है।

चेटी-बाये ! इस समय आपका ध्यान और किसी ओर न जाय, जामाता महादय मणिभूमि मंदिर में स्नान कर रहे हैं, इसलिये आप इसे शोध हो गूथ दे ।सौभाग्यवश मैंने वत्सराज महाराज के पाणि ग्रहण संस्कार सम्बन्धी रमणीय महोत्सवों को देखा।

कौन सोच सकता था कि हम लोग इस अनर्थ जल के आवर्त में पड़कर फिर निकल सकेंगे ? अब तो आनन्द से राज प्रसादों में निवास होता है, अवरोग गृह की वाषिकाओं में स्नान होता है, स्वभाव ही से मधुर एवं कोमल लड्डुओं का भोग लगता है,

लेखक महाकवि भास
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 47
Pdf साइज़3.9 MB
Categoryनाटक(Drama)

स्वप्नवासवदतं नाटक – Swapnavasavadattam Natak Hindi Pdf Free Download

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