सौंदर्य लहरी हिंदी अर्थ सहित | Soundarya Lahari PDF

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सौंदर्य लहरी स्तोत्र  – Soundarya Lahari Pdf Free Download

सौंदर्य लहरी स्तोत्र 

जीत युद्ध में दत्य गणों को, उनके कवच-मुकुट को न आकर शंघु-ग्रसाद- ब्रिमुख जो रहे जान थपडांश-अपील। यदि ही गुह-हरि-भाना, चन-सम स्वच्छ खण्ड कर्पूर-समेत, सातः।

सब साबून कणों को करते हैं स्वीकृत समय ॥अम्- पराक्रम सरस्वती जब करती है वीणा में गान जोश हिलाकर तब तुम उसका ‘साथु-साधु’ कह करती माना इन वचनों की मधुराई से हो

जाता तन्त्री-स्वर मन्द जातः, उसे कर लेती है वह लज्जित हो खोली में बन्द।हिमगिरि ने वत्सलता-वश है, जिसे किया हाथों से प्यार, अथर-पान के हेतु शंभु ने जिसे उठाया बारम्बार ।

तय मुख-मुकुर-नाल-सा, जिसको शिव ने पकड़ा है सविलास, 4. उस तब अनुपम चिबुक-कथन का कर सकता है कौन प्रयास श्री त्रिपुरारि मुजालिङ्गन से जो सन्तन कण्टकवाली,- तब ग्रीवा,

मुख-कमल-नाल सी, है सुन्दर छवि की डाली। स्वतःश्वेत पर कालागुरु लेपन से जो शैबल-सी श्याम,मुक्का-माला मनु मृणाली सी वह दिखती है अभिराम।॥६॥

तब, गवि-गमक-गीत-वर-निपुणे! कण्ट सु-रेखाये जो तीन- है, मांगलिक त्रिसूत्र ‘प्रगुण-गुण वे कन्या विवाह कालीन। बा नाना विच मधुर राग-समूहों की है प्रकट स्थान,

अथवा हैं गाचार-सुमध्यम बाइज ग्राम-नियम-सीमान। समं देवि! – स्कन्दद्धिपबदनपीतं स्तनयुगं, तवेदं नः खेदं हरतु सततं प्रस्तुतमुखम्। यदालोक्याशङ्काकुलितहृदयो हासजनकः,

कुम्भौ हेरम्बः परिमृशति हस्तेन झटिति। अमू बक्षोजावमृतरसमाणिक्यकलशौ, न सन्देहस्पन्दौ नगपतिपताके! मनसि नः। पिबन्तौ तौ यस्मादविदितवधूसङ्गमरसौ.

कुमारावद्यापि द्विरदवदनक्रीञ्चदलनौ। वहत्यम्ब स्तम्बरमदनुजकुम्भप्रकृतिभिः समारब्धां मुक्तामणिमिरमालां हारलतिकां। कुचाभोगो बिम्बाधररुचिभिरन्तःशबलितां।

प्रतापव्यामिश्रां पुरविजयिनः कीर्तिमिव ते। मृणालीमृत्वीनां तब सुणततानां अतसृणां,चतुर्षि: सौन्चर्य सरसिजमवः स्तौति लर्न: । नखेभ्यः संत्रस्यन् प्रथमदमनादन्यकरिपो-

श्चतुर्णा वक्त्राणां समममयदानार्षणविया ॥ नखानामुयोतैर्नवनलिनरागं विहसतां, कराणां ते कान्तिः कथय कथयामः कथमुमे! कयाचिद्वा साम्यं भजतु कलया हन्त कमलं, यदि क्रीडालक्ष्मीचरणतललाक्षारुणदलम् ।

लेखक शंकराचार्य-Shankaracharya
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 67
Pdf साइज़7.4 MB
Categoryसाहित्य(Literature)

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