संक्षिप्ति करण कला | Learn Abbreviation Skill PDF Hindi

संक्षिप्ति करण कला – Summerization learn Skill Book Pdf Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

संक्षिप्तीकरण में भाषा की शुद्धता के अतिरिक्त भाव की भी अपेक्षित है बापा की शुद्धता से तात्पर्य है ऐसी भाषा से की व्याकरण मादि की इष्टि से तो गुड हो ही साथ ही बर्तनी की हृप्टि से भी जुड ही । उदाहृरख के लिए ‘सित’ तथा ‘सीत’ की से सफते हैं ।

यदि ‘सित’ का सीत’ हो जाता है तो अर्थ ही बदल जाता । इसी प्रकार पालि का पाली हो जाने पर अर्थ कुछ का कुछ हो जाता है। माव-शुद्धता से अभिप्राय है कि मूलभाव में कोई मिश्रण या मिलावट नहीं होनी चाहिये । संक्षिप्तीकृत रचना में यही तथ्य या विषय रहना चाहिये,

जो मूल संदर्भ में ही कोई बात अशुद्ध पा विचलित रूप में प्रस्तुत नहीं की जानी चाहिए, अन्यवा भिन्नार्थ बोध की बड़ी संभावना रहती है। संक्षेपण में मूल के प्राशय को विकृत या परिवर्तित करने का अधिकार संक्षेपण को नहीं होता ।

संक्षेपण में संक्षेपका की ओर से किसी टीका-टिप्पणी के लिए भी कोई गुंजाइश नहीं होती। सत्य ही इस रचना / तार की भाषा के लिए भी कोई अवकाश नहीं होना चाहिए, व्याकरण सम्मत भाषा ही वाञ्छनीय समझी जाती है ।

६. प्रवाह और कम-बद्धताः–कभी-कभी ऐसा देखा जाता है कि किसी अवतरण में मूलभाय के साथ बनेक भाव इस प्रकार संबद्ध रहते हैं, उनमें एक बम बना रहता है और कभी-कभी उनके संबंध में कोई क्रम नहीं होता। अक्रमता को सक्रमता में लाना संक्षेपक का कर्तव्य है।

मूल की सक मता को देखने का अधिकार सक्षेपक को तभी हो सकता है जरबकि बह संक्षेपरा को सरल और स्पष्ट कर रहा हो। क्रमबद्ध भाव तथा प्रवाहपूर्ण भाषा संक्षिप्तीकरख की विशेष आवश्यकता है । ऋ्रम घोर प्रवाह संतुलन से ही के संक्षेपण का स्वरूप निखरता है ।

लेखक जे पी शर्मा-J.P.Sharma
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 81
Pdf साइज़3 MB
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संक्षिप्ति करण कला – Sankshipti Karan Kala Book/Pustak Pdf Free Download

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