सामवेद संहिता | Samaveda Samhita PDF Hindi

सामवेद संहिता | Samaveda Samhita Book/Pustak Pdf Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

आयाम विकसित किया । इस क्रम में लगभग एक मनस्थिति के भाव-सम्पन लोगों को लेकर कई शहरों में स्थान- स्थान पर शान्ति-सभाओं का आयोजन किया,

जिसमें प्रयोग- कर्ताओं ने शान्ति- है प्रेम, आनन्द की भाव-तरंगों को धारण-सम्प्रेषण का प्रयोग गहरी तल्लीनता-तन्मयता के साथ किया। प्रयोग के पहले उन स्थानों की अपराध दर-आत्महत्या दर,

जैसे ऑकलन किये गये थे, बाद में इनके घटते क्रम की सुखद अनुभूति हुई। इन सभी प्रयोगों में वैज्ञानिक विधि का पूरा-पूरा पालन किया गया। परिणामों का ऑकलन भी सांख्यकीय गणना प्रणाली से किया गया।

उक्त प्रयोग ऋषियों द्वारा किये गये प्रयोगों की तुलना में चाहे जितने हल्के कहे जाएँ, किन्तु उनसे अब भी भाव- प्रवाहों की क्षमता तो, प्रमाणित हो ही जाती है।

प्रकृति की इस व्यवस्था का लाभ आज भी इस विद्या को विकसित करके उठाया जा सकता है।भावों को उभारने और सम्प्रेषित करने में गायन का महत्त्व हमेशा रहा है और आज भी है।

वेद ने भी इसीलिए उसका उपयोग विशेषज्ञता के साथ किया है। अभिव्यक्ति के तीन माध्यमों (१) गद्य (२) मद और (३) गायन में, गायन को भाव-विद्या में सबसे अग्रणो देखकर उसे विशेष महत्त्व दिया गया।

ज्ञान की अभिव्यक्ति की उक्त तीन विधाओं के कारण वेद को तीन प्रवाहो- युक्त “वेद त्रयी कहा वे ही मंत्र ऋग्वेद, सामवेद और अववविद में पद्य के अनुसार छंदों में बोले जाते हैं और वे ही यजुर्वेद में बोलने के समय गय के समान बोले जाते ।

पाठ की इस परिपाटी का निर्वाह अतिप्राचीन समय से होता आया है। त्रयी हो या चतुष्टयी, वेद मंत्रों की गणना में कोई अंतर नहीं । वेदत्रयी में भाषा की रचना प्रमुख है और वेद चतुष्टयी में प्रतिपा विषय की प्रधानता है।

लेखक रामस्वरूप शर्मा गौड़ – Ramswaroop sharma Gaud
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 328
Pdf साइज़15.8 MB
CategoryReligious

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