साधन अंक | Sadhn Ank

साधन अंक | Sadhn Ank Book/Pustak Pdf Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

बैदान्तशाखमें कई प्रकारसे यह बात बतायी गयी है। कहीं इसके सत्रह अवयव बताये गये हैं- पाँच कर्मेन्द्रिय, पाँच ज्ञानेन्द्रिय, बुद्धि, मन और पाँच प्राण (बेदान्तसार १३); फिर आठ पुरियोंका उल्लेख है

(सुरेश्वराचार्यका पञ्चीकरण चार्तिक)-जिनमें पाँच ज्ञानेन्द्रिय, पाँच कर्मेन्द्रिय, मन, बुद्धि, अहंकार, चित्त, पाँच प्राण, पाँच भूतसूक्ष्म (तन्मात्र) अविद्या, काम और कर्म हैं ।

ऐसे ही और भी कई विघान हैं । इनका शास्त्रकारोंने समन्वय भी किया है ( वेदान्तसार १३ पर विद्वन्मनोरखनी टीका)। यहाँ प्रकृत यह है कि स्थायी भावों के संस्कार इसी लिङ्गशरीरमें हो सकते हैं ।

वह चूँकि जड है, इस लिये उसकी प्रवृत्ति जडोन्मुख होती है । अलङ्कारशास्त्रोंमें यह बार-बार समझाया गया है कि रस न तो कार्य है और न ज्ञाप्य । क्योंकि कार्य होता

तो विभावादि- के नष्ट होनेपर नष्ट नहीं हो जाता, कारणके नष्ट होनेसे कार्यका नष्ट होना नहीं देखा जाता–स च न कार्य, विभावादिविनाशेऽपि तस्य सम्मवप्रसङ्गात् (काव्यप्रकाश ४थे उल्लास )।

परन्तु मधुर रस आत्माका धर्म है,जाता है। शान्त, दास्य, सख्य, वात्सल्य और माधुर्य-इन पाँच प्रकारके प्रेर्मोंमें माधुर्य रस ही सर्वोत्तम है और यह माधुर्य-प्रेम श्रीष्षुषभानुसुता श्रीराषाजीमें ही पूर्णरूपसे मिलता है ।

श्रीराधाजी ही माधुर्वरसाचिश्ात्री महादेवी हैं। इन्हींकी कृपासे माधुर्य प्रेम प्राप्त हो सकता है । धर्म, अर्थ, काम: मोक्षसे भी बढ़कर प्रेम है । प्रेम पञ्चम पुरुषार्थ है ।

भगवान् को वशमें करनेका एकमात्र उपाय प्रेम ही है । भगवान् श्रीकृष्ण प्रेमी भक्तोंके अधीन हैं । अहं भक्त पराधीन: कहकर भगवान्ने दुर्वासा ऋषिको प्रेमी भक्ति अम्बरीषके पास लौटी दिया या ।

जिस प्रेममें किसी प्रकारकी वासना नहीं रहती; साधक केवल अपने प्रियतम के सुख में ही सुखी रहता है तथा अपना कुछ भी अहङ्कार नहीं रखता, वही प्रेम माधुर्य- रसका है और उसे ही पूर्ण प्रेम कहा जाता है ।

लेखक हनुमान प्रसाद-Hanuman Prasad
Gita Press
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 553
Pdf साइज़16 MB
Categoryधार्मिक(Religious)

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