सदाचार अंक | Sadachar Ank

सदाचार अंक | Sadachar Ank Book/Pustak Pdf Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

मनसा-याचा-क्णा प्राणिणात्रकी दित-मावनादे यथार्य चौर श्रेपलर भाज्यान ही सत्य टे। महुम्य की्नमें श्र्दिक सबही सब शुळ नही, उसमें व्यवहार सत्य भी अपेक्षित है।

হয়াসিटक सन्यरमें ब्याक्हारिकताक्षी एक-कपतापार होना व्यातत्यक है । मार्तीय संसकृनतिमं सव्यमावगको ही नाइत्व गी, उसमें एक सीढी गर ै, नह है- सत्यं चूयात् प्रियं नूयात् ॥

सत्य प्रिय दोना चाहिये । सत्य-साधकमें सत्य सिब करनेवी क्षमता होती है । ययवश सा्यगोपन को य पाप समझ तार है । यडू सत्यर्थी द्म तथा इयत्ता उपासना करता है।

अहविसा-सत्य एक सिद्धान्त है तो अहित उसका न्यावद्वारिक रूप ो मानव बिका में सर्व साध्य है। सदाचारी अहिंसाको मनसा बाचा जनगा अपनाता है । হक्षसे विमीको गारना दी हिसा नही,

अप्ति किसीके साथ জन्तःकरणको टेस पढ्ेचाना, कद्ुवरणीडारा मर्मान्तक पीश पहुँचाना, असहायके नायर अपहरण और शापित व्यक्ति के प्रति ‘तो शस्त्र का प्रयोग भी हिंसा है।

मनुम्य जब मिसी मतने प्राण नहीं वाल सपना तो बसे किसी निरी प्रामीके प्रागने यपटरणका क्या (भी জधिकार है ? (इसक मुबिये यह कितने काली सदाच भारतीय चर्में तठाचारको धार्मिक महत्व प्रात है।

यदि इसे नेमा जीवनका, देवोपम जीवनका, धर्मगष जीवनका मूलाधार कहो तो अधुक्ति न होगी सदाचार शब्द का अर्थ कई प्रकार से किये जा सकते है।

यदि सत्का अर्थ ‘अच्छा तो सदाचारका पर्य होन-अ आचार, अच्छा चरण ! इस अयमें वह कदाचार, प्राचार, दुराचार और अत्याचार विपरीतार्थक होगा । यदि सक्का वर्थ ‘सजन’ तो सदाचारका अर्थ है

सब्जनोका आचार, सजनोंदस किया जानेयाश्या व्यवहार । सदका जर्व ‘सत्य’ समा चाय तो सदाचारका वर्ष है–सत्याचरण, सत्यपर आश्रित म्यवाहार, चिन्ता छन् कापडका अधरण ।

पुनः पदि संतवा अर्थ सच्चिदानन्द बाबर 3, तब सटाचारका अभी माद आचार जो सत्फी, मदफी प्राति करा सके-ब आचार जो मोक्षप्रद हे, मोक्षदायक छो ।

लेखक Gita Press
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 274
Pdf साइज़21.3 MB
Categoryधार्मिक(Religious)

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