पंचतंत्र कहानी | Panchatantra Moti Chand

पंचतंत्र – Panchatantra Moti Chand Book/Pustak Pdf Free Download

पुस्तक का एक अंश

“गोमायु नाम के एक सियार ने भूख-प्यास से व्याकु होकर खाने की खोज में वन में इशर-ऊपर घूमते हुए दो सेनामों की लड़ाई का मैदान देखा।

उसने वहां नगाड़े के ऊपर हवा से हिलती हुई शाखा की टोक की गढ़ से पैदा हुई आवाज सुनी। भवरे मन से उसने सोचा, ‘अरे में मर गया!

ऐसी बड़ी बातें करने वाले जानवर की नजर में पड़ने के पहले मुझे चल देना चाहिए। लेकिन सहसा ऐसा करना ठीक नहीं।

“भय अथवा खुशी के मौके पर जो सोचता है और उताबले में काम नहीं करता उसे जीने का कभी मौका नहीं आता।

तो अब में तलाण करूंगा कि यह किसकी आवाज है। बाद में धीरज के साथ सोचता हुआ वह आगे वड़ा और नगाड़ा देखा ।

उसमें से आवाज आती है, यह जानकर उसने पास जाकर खिलवाड़ के लिए उसे बजाया और फिर खुशी से विचारले लगा”बहुत दिनों के बाद मुझे ऐसा बड़ा भोजन मिला है ।

निश्चय ही यह भरपूर डांस, चरबी और लहू से भरा होगा।” बाद में सन्त चमड़े से जुड़े हुए नगाड़े को किसी तरह चीरकर और एक भाग में छेद करके वह उसमें घुस गया।

चमड़ा बीरते हुए उसके दाँत भी टूट गए। केवल लकड़ी के नगाड़े को देख निराश होकर मियार में यह इलोक पढ़ा |

“मैंने पहले जाना कि वह चर्बी से भरा होगा। पर अन्दर पुसने के बाद उसमें जितना चमड़ा बीर जितनी बड़ी की, बहू ठीक- ठीक समझ में आई।

इसलिए आपको केवल बाबा से डरना नहीं चाहिए। ने कहा, ” Frere “अरे भाई, जब हमारा सारा कुटुम्ब हो भय से व्याकुल होकर नाग जाना चाहता है तो में कैमे पैंयं पारण कर नकता हैं ।” दमनक ने “स्थामी। इसमें उनका दोष नहीं है, फ्योकि मेव |

लेखकमोती चांद -Moti Chand
भाषाहिन्दी
कुल पृष्ठ305
Pdf साइज़8.5 MB
Categoryबाल पुस्तके(Children)

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