निरोग जीवन का राजमार्ग | Way To Live Healty Life PDF

निरोग जीवन का राजमार्ग – Nirog Jeevan Ka Rajmarg Book/Pustak PDF Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

हमारे शरीर की रचना ही कुछ ऐसी बनाई गई है कि अवांछनीय विजातीय द्रव्यों, संवित विषो, गंदी वस्तुओं या विषैले पदार्थों को मित्र-भिन्न द्वारों से निकालकर बाहर करती रहती है।

हमारी छोटी-मोटी भूली-जैसे खानपान का असंयम, अत्यधिक थकान, चलते-फिरते. उपरो-पेठले जीवन शक्तियों की न्यूनता इत्यादि को प्रकृति स्वयं दुरुस्त करती है और प्रायः प्रकृति के इस उपयोगी कार्य का हमें पता भी नहीं चलता।

सृष्टि के सनी जीव-जंतु इन्हीं प्राकृतिक क्रियाओं से स्वस्थ रहते हैं।

प्रकृति ने प्रत्येक शरीर में ऐसे-ऐसे गुप्त द्वार रखे हैं, जिनके द्वारा विषैले पदार्थ स्वयं निकलते रहते हैं और हमारी आकृति में यथोचित सुंदरता को अनुष्ण रखते हैं।

यदि प्रकृति इस महान कार्य को अपने आप स्वाभाविक गति से संपन्न न करती तो हमारे शरीर बेदगे हो जाते, अगर में भद्दामन और विषमता उत्पन्न जाती, हम लोग रोज ही अपच, का, स्थूलता. सूजन, को्ड फुसो, गठिया, प्रमाद, सिर दर्द या

अन्य ऐसे ही छोटे-मोटे रोगों के शिकार रक्षा करते। भाग्यवश ऐसा नहीं है।

हमारे शरीर के अंदर व्याप्त प्रकृति इन विपेले पदार्थों से निस्तर स्पर्ष करती रहती है. अनावश्यक पदार्थ को शरीर में ठहरने नहीं देती और हमारे साधारण शारीरिक विकारी को दुरुस्त करती रहती है।

प्राकृतिक रूप से स्वस्थ मनुष्य की पहचान प्रकृति ने मनुष्य को विश्व का सबसे सुंदर शारीरिक, मानसिक, आध्यात्मिक शक्तियों से सफ्त्र स्वस्थ सशक्स, सुडौल, दीर्घजीवी प्राणी बनाया है।

आरोग्य और उत्तम स्वास्थ्य का मार्ग उसने बड़ा सरल और शोधा रखा है। मनुष्य को क्या, आल्पुद्धि बाले पशु पक्षी भी उसे भली-भांति समझ सकते है। कतिक मनुष्य का आकार संतुलित होना चहिए।

कद न काफी ऊँचा हो न शरीर पतला-दुबला अस्थिपिंजरत हो, न भारी-भरकम मांस से लटकता हुआ पोपला हो, प्रत्युत संतुलित रूप से प्रत्येक अंग विकसित हो. शरीर की मशीन का प्रत्येक कलपुजा ठीक काम करता हो।

लेखक श्री राम शर्मा-Shri Ram Sharma
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 48
Pdf साइज़3.8 MB
Categoryस्वास्थ्य(Health)

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