बिना औषधि के कायाकल्प | Bina Aushadhi Ke Kayakalp PDF

बिना औषधि के कायाकल्प | Bina Aushadhi Ke Kayakalp Book/Pustak Pdf Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

महामारियों फैलती हैं। कुत्ते, घोड़े, ऊँट, हाथी. तोते. तीतर आदि भी बीमार रहने लगे है और अब इनके लिए “मवेशियों के अस्पताल खोलने की आवश्यकता पड़ने लगी है, यह सब मनुष्य की संगति का फल है।

अपनी कमाई को, बीमारियों को, उसने अपने साथी पशुओं को भी उपहार में दिया है हाँ. जो जानवर उसके निकट संपर्क से दूर है,

अपने आहार-विहार रहन-सहन के बारे में स्वतंत्र है. मनुष्य के उस उपहार को प्राप्त करने से रोगी बनने से अभी बचे हुए है।

जो जीव आदमी के चंगुल में जिस हद तक फैस जायेगा, उसी हद तक उसे बीमारियों का तोहफा मी मिलता जायेगा।यह बात सचमुच बड़े आश्चर्य की लगती है कि बुद्धिहीन और साधनहीन होते हुए भी अन्य समस्त जीव निरोग रहते हैं

.किंतु अकेला मनुष्य ही ऐसा है, जो बीमारियों की यातना भुगतता है और जिन जीों को अपने संपर्क में बांध लेता है उन्हें भी उसी नरक में घसीटकर पटक देता है।मनुष्य की बुद्धि बड़ी तीव्र है.

उसने अपने बुद्धिबल से बड़े-बड़े आश्चर्यजनक आविष्कार किये हैं, बड़ी-बड़ी मशीने ईजाद की है, ज्ञान विज्ञान की अनेकानेक शोधे की है. जिधर देखिये उघर ही मनुष्य की बुद्धि का चमत्कार दिखाई पड़ता है,

किंतु जीवन की मूलभूत समस्या स्वास्थ्य के संबंध में उसकी युद्धिनता न जाने कहीं गायब हो गई है ? ऐश आराम और भोग-विलास की एक से एक नई अद्भुत और अनोखी तरकीब उसने ईजाद की है.

पर निरोगता एवं दीर्घ जीवन के संबंध में कोई कारगर तरकीब हाथ न आई।

इस दिशा में जितने प्रयत्न किये गये, वे लाभ के स्थान पर प्रायः हानिकारक ही सिद्ध हुए।स्वास्थ्य संबंधी इस विषम स्थिति पर गभीर विवेचन करने से प्रतीत होता है

लेखक श्री राम शर्मा-Shri Ram Sharma
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 48
Pdf साइज़2.1 MB
Categoryआयुर्वेद(Ayurveda)

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