मंत्र साधना | Mantra Sadhana

मंत्र साधना | Mantra Sadhana Book/Pustak Pdf Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

इस स्तोत्र की रचना श्री अंगिरा ऋषि ने मारण हेतु की थी। इसका प्रयोग कभी निकल नहीं होता। अनी संख्या में जप हो जाने पर इसे लिखकर दायीं भुजा अथवा का में धारण करने से शत्रुओं का नाश होता है।

समस्त अनिष्ट ग्रहों की शांति, दुष्टों का मन करने तथा समस्त पापों का नाश करने में यह स्तोत्र अति उत्तम माना जाता है। कृष्ण पक्ष की अष्टमी से लेकर अमावस्या की रात्रि तक यदि प्रतिदिन

इसके एक हजार की संख्या में पाठ किये जाये तो सहज ही शत्रु पक्ष का विलय हो प्रस्तुत स्तोत्र का पाठ भगवती के तर्पण हेतु किया जाता है। इस स्तोत्र का पाठ करते हुए

मां त्रिपुर सुंदरी के यंत्र अथवा चित्र पर निरंतर धारा प्रवाहित की जाती है। यदि केवल शहद अथवा गंगाजल में शहद मिलाकर यह धारा प्रवाहित की जाये तो इसके परिणाम स्वरूप साधक की सभी कामनाएं पूर्ण होती हैं।

लम्बी आयु के लिए शुद्ध पी से तर्पण किया जाता है। लम्बी बीमारी से छुटकारे के लिए सायक को दूध से तर्पण करना चाहिए और सभी कामनाओं की पूर्ति के लिए नित्य प्रति नारियल के जल से तर्पण करना चाहिए।

सर्वप्रथम भगवती श्री राज राजेश्वरी का ध्यान करें किसी वेश्या अथवा मासिक धर्म समय स्त्री के पास बैठकर इस स्तोत्र के एक सौ आठ बार पाठ करने से यह सिद्ध से जाता है और स्मरण करने मात्र से सिद्धियां प्रत्यक्ष हो जाती है।

एक निश्चित अवधि में इस स्तोत्र की दस हजार आवृत्तियां करने पर एक पुरश्चरण पूर्ण होता है। पुरश्चरण पूर्ण होने पर यह सिद्ध होकर साधक की समस्त मनोकामनाएं पूर्ण करने में समर्थ होता है।

पुरश्चरण के उपरान्त यदि किसी का वशीकरण करना हो तो इस स्तोत्र का एक हजार बार पाठ करें। यदि किसी भी लोक की कन्या का वशीकरण करना वशीकरण होता है।

लेखक योगेश्वरानंद-Yogeshwaranand
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 146
Pdf साइज़2.4 MB
Categoryधार्मिक(Religious)

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