मानव धर्म क्या है | Humanity PDF In Hindi

मानव धर्म – Manav Dharma Pdf Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

इसप्रकार अनेक कारणों से धैर्यका झूटना सम्भव होता है, परन्तु चेष्टा करनेपर बैर्यकी रक्षा हो सकती है ! वैर् ही सत्य और ठेककी रक्षा करता है । यदि धैर्य न होता तो बाज हरिश्चन्द, मयूरध्वज, पितामह भीष्म,

युधिष्ठिर और अ्जुनका इतना नाम नहीं रहता । राणा प्रतापके नामको अमर वनानेवाला धर्म धैर्य ही है, एक बार जरासा धैर्य छूटनेपर सारी टेकपर पानी फिरने लगा था, परन्तु मगवान्ने उन्हें बचाया !

धैर्य अन्यान्य धोके पालनमें एक बड़ा सहायक है, इसीलिये सम्भवतः मनु महाराजने सबसे पहले इसका नाम लिया है । भगवत्-प्रासिके लिये जब साधक पहले-पहले साधनामें प्रवृत्त होता है,

तब धैर्य ही उसका प्रधान सहायक होता है ! धैर्य-युक बुद्धि के बिना मकान वशमं होना सम्भव नहीं और मनके वशमें हुए हुए विना परमात्माकी प्राप्ति होना अत्यन्त कठिन है ।

जो साधक दश पाँच दिनोंकी साधनासे ही उकता कर धर्य छोड़ देता है वह जहाँ-का-तहाँ रह जाता है, परन्तु जो धैर्य के साथ साषनमें लगा रहता है उसके हृदयमें साधनकी परिपक्वता होनेपर

परमात्मा को पाने के डिये अचछ बैर्यके परिणामस्वरूप एक विलक्षण अधीरता उत्पन्न होती है और उसके उत्पन्न होते ही परमात्माके कल्याणमय दर्शनका शुभ समय आ पहुँचता है।

दूसरा धर्म है क्षमा । अपना. अपकार करनेवालेसे बदला लेनेकी पूरी सामर्थ्य रहते हुए भी बदला न लेकर उस अपकारको प्रसन्नताके साथ सहन कर लेना क्षमा कहलाता है।

सत्यपि सामध्ये अपकार शहरों क्षमा ।मनुष्य मायासे मोहित है, मोहके कारण वह मोगों में समझकर उनकी प्राप्तिके लिये परिणाम न सोचकर दूसरेका अनिष्ट कर बैठता है।

मनसे साधारण प्रतिकूट घटनामें ही मनुष्य अपना अनिष्ट मान लेता है और उसी अवस्थामें उसे क्रोध आता है । आगे चकर इसी क्रोधके कई रूप बन जाते हैं, जिन्हें देष, वैर, है।

लेखक हनुमान प्रसाद-Hanuman Prasad
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 114
Pdf साइज़4.3 MB
Categoryप्रेरक(Inspirational)

मानव धर्म – Humanity Book Pdf Free Download

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