खून के आंसू | Blood And Tears Hindi PDF

खून के आंसू – Khun Ke Ansu Book/Pustak Pdf Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

बस छोड़ गया दुनियां में अफसाना भगतसिंह। है बच्चे बच्चेकी जांपर उस्का फिसाना। वो शेरे नर पंजाब दिलेराना भगतसिंह । एसम्बलीकी मिटिंगमें बम फेंकके यारों, एक बाल खुदी कर गया मरदाना भगतसिंह ।

गैरों का मुसीबतमें फंसा देखके यारों, अपनी ही जा पै खेल गया दाना भगतसिंह। लाहौरके थानों में पर्चे लाल बांट के, कहता था सितम अब कभी मत ढाना भगतसिंह हड़ताल मनाई गई हिन्दोस्तानमें, बस कर गया

एक हमको दीवाना भगतसिंह हड़ताल भूख जेलमें की तीन महीने, बे आवा दाना जिन्दा रहा दाना भगतसिंह ।फिर भी तो सात पोड वजन और बढ़ गया। वस खूने दिल पिया लिया गम खाना भगतसिंह कहतो थी यू सरकार के तुम माफी मांग ले,

पर बन गया आजादीका परवाना भगत सिंह । कहती थी यू’सरकारके क्या चाहते हो कह दे ललकार वृटिश का नाश कहा। हो जांय गर्क दुश्मन मेरे,कह तजा प्राण हत्यारों में।

शेर कयामत हो गई बरपा जरमीं थरो उठी उसदम। मेरे प्यारे भगतका नगमा हो पढ़ने लगे उसदम फरीस्ते हांथ मलते थे शवा सरका पटकती थी जमीनों श्रासमांपर छा गया एक बारगी मातम थर्राया फलक उठी कांप जमी,

लाहौर की जेलसे निकली शदा। हो गये शहीद भगत वा गुरू,ये धूम है “दर्दी बाजारों में।आजादीका दीवाना था मस्ताना भगतसिंह । एसम्बली में घुस गया दर्शना भगतसिंह ॥ सन उन्निस से उनन्तिस और अप्रेल पाठके.

बम मारके डटा रहा मरदाना भगतसिंह। है उसको फांसीका कलक हिन्दोस्तानको गोली दिखा दो फांसी मत लटकाना भगतसिंह लाहौरका वो रहेनेवाला शेर बबर दिल, कर नाम गया दुनिया में मरदाना भगतसिंह ।

सरदार किशनसिंह है उनके पिताका नाम, मरदोंमें मर्द श्राकिला और दाना भगतसिंह। सुकदेव और राजगुरु और भगतसिंह, तीनोंका बना स्वर्गमें स्थाना भगतसिंह ।-देश सेवक।किस शानसे पहुंचा है सरदार भगतसिंह, मन्सूर है उस दौरका सरदार भगतसिंह

लेखक भोलानाथ दर्दी-Bholanath Dardi
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 24
Pdf साइज़1.1 MB
Categoryप्रेरक(Inspirational)

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