कश्मीर समस्या और पृष्ठभूमि | Kashmeer Samasya Aur Prishthbhumi

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पुस्तक का एक मशीनी अंश

काश्मीर का इतिहास

जम्मू और काश्मीर राज्य का क्षेत्रफल ८६,०२३ वर्गमील है। प्राकार में यह इंग्लैंड, वेल्स और स्काटलैंड के बराबर है। यह उत्तर में अफगानिस्तान, चीन और रूस तथा पश्चिम और दक्षिण में पाकिस्तान से घिरा है।

इसकी आबादी मिश्रित है। ७७ प्रतिशत मुसलमान, २० प्रतिशत हिन्दू ३ प्रतिशत सिख और बौद्ध मत के अनु यायी व अन्य अल्पसंख्यक वर्ग के लोग हैं।

इसके उत्तर में गिलगित, चितराल और बाल्टिस्तान हैं, जहां के लोग मुख्यत: मुसलमान हैं। केन्द्र में काश्मीर की घाटी है। यहां हिन्दू और मुसलमान दोनों आबाद हैं।

दक्षिण में जम्मू है जहां की आबादी अधिकांशतः हिन्दू है। ये हिन्दू डोगरा जाति के हैं। तिब्बत और काश्मीर घाटी के बीच लद्दाख है जहां तिब्बती वंश के बौद्ध रहते ।

मुस्लिम शासन

हिन्दू-श्राधिपत्य का दौर लगभग सन् १३३९ में समाप्त हुआ और मुसलमान शासकों का दौर प्रारम्भ हुआ। चौदहवीं शताब्दी के शुरू में जुल्जू या दुलाहा नामक आक्रमणकारी ने काश्मीर पर बड़ा जबरदस्त हमला किया।

इस आक्रमणकारी को हराने के लिए घाटी के सेनापति ने पश्चिम में स्थित स्वात के शाहमीर और पूर्व में तिब्बत के रेंछन शाह से सहायता ली। रेंछन शाह ने सेनापति को मार डाला और उसकी पुत्री कोटा रानी से विवाह करके स्वयं काश्मीर की गद्दी पर बैठ गया।

बाद में र शाह मुसलमान हो गया और अपना नाम सदरुद्दीन रखा। रेंछन शाह फिर हिन्दू नहीं बन सका, क्योंकि हिन्दू जाति उसे अपनाने को तैयार नहीं थी।

कहा जाता है कि एक दिन सुबह उसने बुलबुल शाह को नमाज पढ़ते देखा और नमाज पढ़ने के ढंग से प्रभावित होकर तुरन्त इस्लाम धर्म को ग्रहण कर लिया।

लेखक गोपीनाथ श्रीवास्तव-Gopinath Srivastav
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 238
Pdf साइज़25.4 MB
Categoryइतिहास(History)

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