मध्यकालीन भारत अमीर खुसरो | Madhyakalin Bharat

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अमीर खुसरो की भारत की धारणा

सैयद अली नदीम रिज़वी

ऐसा मालूम होता है कि हिन्दवी फ़ारसी साहित्य में तेरहवीं सदी तक एक सुस्पष्ट भौगोलिक इकाई के रूप में भारत की धारणा एक गंगा-जमनी तहजीब की समझ और साथ में देश से प्रेम की भावना के साथ-साथ जन्म ले चुकी थी।

ऐसी देशभक्ति और साझी विरासत के विचारों का सबसे प्रमुख उदाहरण देहली सल्तनत के राजकवि अमीर खुसरो की रचनाओं में मिलता है। अमीर गुसरो का जन्म 1253 में आज के जिला एटा (उत्तर प्रदेश) के पटियाली गाँव में हुआ।

उनके पिता अमीर सैफुद्दीन महमूद एक तुर्क थे, जो खुसरो के जन्म से कुछ साल पहले इल्तुतमिश के शासनकाल के दौरान उजबेकिस्तान के नगर कुश (आज का शहरे-सब्त) से भारत आए थे।

उनकी माता देहली के एक कुलीन इमादुल मुल्क की बेटी थीं। खुसरो एक जबरदस्त लिक्खाड़ थे और वे क़िरानुस्सा दैन, मिताहुल कुतूह, शौरी व खुसरो, हश्त बिहिश्त, मस्नवी देवलरानी व खान,

मलदल अनवार, एजाजे खुसरबी, खायनुल फुतूह और नूह सिपिटर जैसी महत्वपूर्ण रचनाएँ रची है। इनमें से लगभग सभी रचनाओं में खुसरो के ऐसे बयान भी मौजूद हैं

जो भारत के बारे में उनकी दृष्टि और धारणा को समझने में हमें मदद देते हैं। फिर भी देशभक्ति सम्बन्धी बयानों के सिलसिले में नृह सिपिहर सबसे अधिक सम्पन्न मालूम होती है।

नूह सिपिहर एक मस्तवो है जिसे खुसरो ने 1318 में पूरा किया था और यह मुबारक ह खलजी की तारोफ़ में है। यह भारत के बारे में दूसरों के विचारों की सबसे मुकम्मल ढंग से करती मालूम होती है,

ये विचार हैं जिनको विकसित करने की कोशिश उन्होंने पहले की रचनाओं में की थी। यह रचना नी अध्यायों में विभाजित है, जो नौ आकाशों यानी कि स्वर्ग के न (सिपिटर) की संगत है।

लेखक सैयद अली नदीम रिज़वी-Syed Ali Nadeem Rizvi
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 10
Pdf साइज़679.4 KB
Categoryइतिहास(History)

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