होमियोपैथिक चिकित्सा | Homeopathic Practical PDF In Hindi

रोग तथा उनकी होम्योपैथिक चिकित्सा – Homeopathic Chikitsa Book Pdf Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

उत्पन्न होती है और दूसरे अस्थि-स्थानमें चिपक जाती है । मांस- पेशियोंका मध्य घना भाग मासोदर कहलाता है इसके सिरे (अर्यात उत्पन्न होने और मिलनेका स्थान) कंडरा (tendons) कहलाता है।

ये बहुत ही मजबूत और चमकीले तन्तु होते है, जिनमें लचीलापन नहीं होता।

मांस-पेशियोंमें स्नायुके सिरे प्रवेश करते हैं। इनमें अनेकानेक रक्तवाहिनियाँ होती है। प्रत्येक मांस-पेशीमें तनाव रहनेका आवास होता है। प्रत्येक मांस-पेशीमें लचीलापन, संकोचनशीलता और उत्तेजनशीलता रहती है ।

জयु (nerve)-स्नायु सब विजलीके वारकी तरह जीयनसे ओत-प्रोत है। बे चमकीले, कड़े और डोरीकी तरह है।

वे या तो मस्तिफसे अथवा मेरुदंडसे मजासे उत्पन्न होते है बोर चर्म, मांस पेशी तथा अन्य यंत्रोंमे सम्मिलित होकर कार्य करते रहते है।

ये थागे लिखी तीन क्रियाओंमेंसे कोई-न-कोई क्रिया करते है :- ( क ) चालक स्नायु (motor nerves )-इसका सम्बन्ध पेशियोंकी गतिसे होता अर्षाद ये कुल मास-पेशियोंकी सिकुडने, फेलने या इकट्ठा होनेका आादेश देते हैं, जिसमें वे अन्त होते है।

(ख) सांवेदनिक जाये ( sensory nerves ) है इसका सम्बन्ध शान या चेतनासे रहता है जैसे-हाथ नहीं प्राप्त करेंगे या दूसरे शब्दोंमें यह कहा जा सकता है कि वे क्षय हो जायेंगे।

शरीरके प्रधान स्नायु ये हैं :- ग्रधसी स्नायु- यह जाके पीछेसे ऊपर जाता है। दूसरा है-प्रगडिय ( brachial) स्नायु, जो बगलके गड़हे या कक्ष-गहरसे निकलता है।

वाकी स्नायु सब छोटे छोटे या सूक्ष्म हैं, वे मांस-पटलसे छिपे हुए है। वे स्थानिक रक्त वाहिनियोंके साथ ही पटलमें जाते हैं और उसके साथ ही बट जाते हैं।

उनकी रक्षाका प्रवन्ध हड्डियों द्वारा होता है । रक-वाहिनियाँ-हत्पिण्डसे कितने ही तरहके नल या नाड़ियाँ निकलती हैं।

इनके द्वारा ही सारे शरीरमें खूनका दौरान होता है। इसी वजहसे इन्हें रक्तवहा नाड़ियाँ (blood vessels ) कहते हैं ।

इनके तीन विभाग हैं 🙁 १) धमनी ( artery) या वे नालियाँ, जिनमें शुद्ध लाल रक्त प्रवाहित होता है और जिसके द्वारा हृदयसे निकलकर शुद्ध रक्त शरीरके दूर-दूतकके भागमें पहुँचता है।

लेखक एम.भट्टाचार्य-M.Bhattacharya
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 1328
Pdf साइज़37.9 MB
Categoryआयुर्वेद(Ayurveda)

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