गुरु ब्रह्मा गुरु विष्णु मंत्र | Guru Brahma, Guru Vishnu PDF In Hindi

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गुरु ब्रह्मा गुरु विष्णु श्लोक अर्थसहित – guru brahma guru vishnu shloka with meaning PDF Free Download

गुरु ब्रह्मा मंत्र

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः ।
गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः ||

भावार्थ:

गुरु ब्रह्मा है, गुरु विष्णु है, गुरु हि शंकर है।

गुरु हि साक्षात् परब्रह्म है, उन सद्गुरु को प्रणाम ।

विनयफलं शुश्रूषा गुरुशुश्रूषाफलं श्रुतं ज्ञानम् ।
ज्ञानस्य फलं विरतिः विरतिफलं चाश्रवनिरोधः ।।

भावार्थ:

विनय का फल सेवा है, गुरुसेवा का फल ज्ञान है, ज्ञान का फल विरक्ति (स्थायित्व) है, और विरक्ति का फल आश्रवनिरोध (बंधनमुक्ति तथा मोक्ष) है।

अखण्डमण्डलाकारं व्याप्तं येन चराचरम्।
तत्पदं दर्शितं येन तस्मै श्रीगुरवे नमः ।।

भावार्थ:

उस महान गुरु को अभिवादन, जिसने उस |

अवस्था का साक्षात्कार करना संभव किया जो पूरे ब्रम्हांड में व्याप्त है, सभी जीवित और मृत्य (मृत) में।

धर्मज्ञो धर्मकर्ता च सदा धर्मपरायणः ।
तत्त्वेभ्यः सर्वशास्त्रार्थादेशको गुरुरुच्यते ।।

भावार्थ:

धर्म को जाननेवाले, धर्म मुताबिक आचरण करनेवाले, धर्मपरायण, और सब शास्त्रों में से तत्त्वों का आदेश करनेवाले गुरु कहे जाते हैं।

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भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 4
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