फायर एरिया (आग क्षेत्र) | Fire Area In Hindi

फायर एरिया | Fire Area Book/Pustak PDF Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

जिस सुबह उसने अपना गांव छोड़ा, वह सुबह उसे काफी दिनों तक याद रही। गांव तब सो रहा था। पौ फट रही थी। उजाला फुहार की तरह अंधेरे पर गिर रहा था।

धीरे-धीरे रात का अंधेरा छंटता जा रहा था। मानो आसमान से पूर्णिमा के चांद ने विदाई न ली हो। छोटे-बड़े अनगिनत तारों की चमक अभी मलीन नहीं हुई थी।

पेड़ों पर चिड़ियों ने शोर मचाना शुरू नहीं किया था। शायद अभी रात बाकी थी। मगर सुबह की ठंड का अहसास होने लगा था। वह ननकू के साथ घर बाहर आया।

सीमेंट के बोरे में चावल और टीन के बक्से में उसके कपड़े थे। घर के लोग भाई, मौजाई और उसका खिलौना लड्डू…हां लड्डू, पता नहीं इतना सवेरे कैसे जाग गया था-सब के सब उसके साथ बाहर निकल आए।

उसने भाई और भाभी के पैर छुए, फिर उस धरती के पैर जिसकी भीनी महक उसके मन में बसी हुई थी। उसका भाई भर्राए गले से ननकू से बोला, “ननकू भाई, जरा ध्यान रखना, इसे नौकरी दिला देना।”

“तुम फिक्र मत करो, लड़का पढ़ा-लिखा है इसके काम का क्या सोचना ?” “पर ननकू भाई” – उसके भाई ने ननकू की बांह घर ली, “परदेस का मामला है, अल्हड़ लड़का है, ऊंच-नीच तो अब तुम ही संभालोगे.।”

आगे जैसे उसकी आवाज बैठ गई। उसने भी आंसुओं से उमड़ते सैलाव को रोकने के लिए मुंह दूसरी ओर घुमा लिया।

अपने दरवाजे से दो मील पैदल चलना था तब पक्की सड़क मिलती और तब वह पेट्रोल से चलने वाली खटारा बस जिस पर पहले से आदमी ऐसे लटके होते थे जैसे गुड़ की भेली के साथ चिपकी हुई मक्खियां।

दो मील की यह पहली यात्रा भी उसे काफी दिनों । तक याद रही। गांव के बीचोंबीच विशाल बरगद के पेड़ के पास वह ठिठककर खड़ा हो गया।

उस पेड़ के नीचे गांव वालों का बचपन गुजरता रहा है। सैकड़ों सालों से, पता नहीं किस जमाने से, लड़कों का झुंड उसके नीचे जमा होता आया है। गिल्लीडंडा के गड्ढे जमीन पर हमेशा दिखाई देते हैं।

लेखक इलियास अहमद गद्दी-Ilyas Ahmed Gaddi
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 288
Pdf साइज़16.3 MB
Categoryउपन्यास(Novel)

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