आरती संग्रह दधिमती माता | Aarti Sangrah Dadhimati Mata PDF

आरती संग्रह दधिमती माता – Aarti Sangrah Dadhimati Mata Book/Pustak PDF Free Download

Aarti Sangrah Dadhimati Mata Lyrics

श्री गजानन्द स्तुति

ओ३म् गजाननं भूत गणाधि सेवितम्,

कपित्थ जम्बू फल चारू भक्षणम् ।।

उमासुतं शोक विनाश कारकम्,

नमामि विघ्नेश्वर पाद पंकजम् ।।

सर्व विघ्न विनाशाय सर्व कल्याण हेतवे

पार्वती पुत्र पुत्राय गणेशाय नमो नमः ।।

श्री गणपति आरती

जय गणेश जय गणेश देवा |

माता जाकी पार्वती पिता महा देवा ।। जय ।।

लडुवन को भोग लगे संत करे सेवा।

पान चढ़े पुष्प चढ़े और चढ़े मेवा ।। जय गणेश ।।

जय गणेश एक दंत दयायन्त चार भुजा धारी।

मस्तक पर सिन्दुर सोहे. मूसे की सवारी।। जय गणेश ।।

अंधन को आंख देत कोडियन को काया ।

बांझन को पुत्र देत निर्धन को माया ।। जय गणेश।।

दीनन की लाज रखो शंभु सुत वारी।

कामना को पूरी करो जाऊँ बलिहारी॥ जय गणेश ।।

गायत्री मंत्र

ओ३म् भुर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धीयो यो नः प्रचोदयात्।।

शान्ति पाठ

ओ३म् थौः शान्तिरन्तरिक्ष शान्तिः पृथ्वी शांतिरायः शान्तिरोषधयः ।

वनस्पतयः शान्ति विश्वदेवाः शान्ति ब्रह्म शान्तिः सर्व शान्तिः

शान्तिरेव शान्तिः सा मा शान्ति रेधि ओ३म् शन्तिः शान्तिः शान्तिः ।

श्री दधिमथी अष्टापदी

जय जय जनक सुनन्दिनी हरि वंदनी है, हरि वंदनी है।

दुष्ट निकंदनी भात जय जय विष्णु प्रिये ।। टेर ।।

सकल मनोरथ दोहिनी, जग सोहिनी है।

पशुपति मोहिनी मात, जय जय विष्णु प्रिये ।। 1 ।।

विकट निशाचर कुन्थिनी, दधिमंथनी है।

त्रिभुवन ग्रन्थिनी मात, जय जय विष्णु प्रिये।। 2 ।।

दिवानाथ सम भासिनी, मुख हासिनी है।

मरूधर वासिनी मात, जय जय विष्णु प्रिये ।। 3 ।।

जगदंब जय कारिणी, खल हारिणी है।

मृग रिपु चारिणी माल, जय जय विष्णु प्रिये ॥ 4 ॥

जगत पालिनी, जय जय विष्णु प्रिये

खल दल दालिनी मात, जय जय विष्णु प्रिये ।। 5 ।।

तेज विजित सौदायिनी, हरि भामिनी है।

अहि गज गामिनी मात, जय जय विष्णु प्रिये ।।6।।

धरणी घर सुसुहायिनी, श्रुति गायिनी है।

वांछित दायिनी मात, जय जय विष्णु प्रिये ॥ 7 ॥

लेखक
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 60
PDF साइज़11.6 MB
CategoryReligious

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