यथार्थ गीता | Yatharth Geeta PDF In Hindi

यथार्थ गीता – Yatharth Geeta Book/Pustak Pdf Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

श्रीकृष्ण जिस स्तर की बात करते हैं, क्रमशः चलकर उसी स्तर पर खड़ा होनेवाला कोई महापुरुष ही अक्षरशः बता सकेगा कि श्रीकृष्ण ने जिस समय गीता का उपदेश दिया था,

उस समय उनके मनोगत भाव क्या थे? मनोगत समस्त भाव कहने में नहीं आते। कुछ तो कहने में आ पाते हैं, कुछ भाव-भंगिमा से व्यक्त होते हैं और शेष पर्याप्त क्रियात्मक हैं- जिन्हें कोई पथिक चलकर ही जान सकता है।

जिस स्तर पर श्रीकृष्ण थे, क्रमशः चलकर उसी अवस्था को प्राप्त महापुरुष ही जानता है कि गीता कहती है। वह गीता की पंक्तियाँ ही नहीं दुहराता, बल्कि उनके भावों को भी दर्शा देता है;

क्योंकि जो दृश्य श्रीकृष्ण के सामने था, वही उस वर्तमान महापुरुष के समक्ष भी है। इसलिये वह देखता है, दिखा देगा; आपमें जागृत भी कर देगा, उस पथ पर चला भी देगा।

‘पूज्य श्री परमहंस जी महाराज’ भी उसी स्तर के महापुरुष थे। उनकी वाणी तथा अन्त:प्रेरणा से मुझे गीता का जो अर्थ मिला, उसी सेवजतन गीता है।

महायोगेश्वर ने क्या जपने के लिये कहा? ओम्। अर्जुन ओम् अक्षय परमात्मा का नाम है, उसका जप कर और ध्यान मेरा घर। एक ही कर्म है गीता में वर्णित परमदेव एक परमात्मा की सेवा।

उन्हें श्रद्धा से अपने हदव धारण करें। अस्तु, आरम्भ से ही गीता आपका शाख रहा है। भगवान श्रीकृष्ण के हजारों वर्ष पश्चात् परवतों जिन महापुरुषों ने एक ईश्वर को सत्य बताया, गीता के ही सन्देशवाहक हैं।

ईश्वर से ही लौकिक एवं पारलौकिक सुखों की कामना, ईश्वर से डरना, अन्य किसी को ईश्वर न मानना- यहाँ तक तो सभी महापुरुषों ने बताया; किन्तु ईश्वरीय साधना,

लेखक स्वामी अडगड़ानंद-Swami Adgadanand
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 429
Pdf साइज़3.2 MB
Category Religious

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