त्याग पत्र उपन्यास | Tyagpatra Novel PDF In Hindi

त्यागपत्र उपन्यास – Tyag Patra Upanyas Book Pdf Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

इतना तो उनकी मौतके दसियों वर्ष पहले से जानता था। फिर भी जानना चाहता हैँ कि अन्त समय क्या उन्होंने अपने इस भर्ती को भी याद किया था ! याद किया होगा, यह अनुमान करके रोंगटे खड़े हो जाते हैं।

हम लोगोंका असली घर पतोहकी और था । पिता प्रतिष्ठावाले थे और माता अत्यंत कुशल गृहिणी थी। जैसी कुगत थी वैसी कोमल भी होती तो-! पर नहीं, उस तो-‘के मुँइमें नहीं बढना होगा । बढ़े, कि गये ।

फिर तो सारी कहानी उस मुंहमें निगल कर समा जायगी और उसमेसे निकलना भी नसीब न होगा । इतना ही हम समझ कि माँ जितनी कुशल थीं उतनी कोमल नहीं थी। बुला पिताजीसे काफी छोटी थी।

मुझे कोई चार-पाच वर्ष बडौ होंगी। मेरी माताके संरक्षणमें मेरी ही भाँति भी रहती चौ। बह संरक्षण ढीला न था और आज भी मेरे मनमें उस यनुशासनकी कड़ाईक लाभालामका विचार चला करता है ।

पिताजी टो भाई थे और तीन बहन । भाई पहले तो योबरसिपरीमें धुक्तप्रान्तके इन-उन जिलोंमें रहे ।

फिर एकाएक उनकी इच्छा के अनुकूल उन्हें वरमा भेज दिया गया। वह तबसे वहीं बस गये और धीमे-धीमे धाना जाना एक राज रस्मकी बात रखी गई।

इधर यह सिलसिला भी लगभग सूख चला था। दो बड़ी बहनें विवाहित होने के बाद प्रसब-संकटमें चल बसी थी। अफेनी यह छोटी बुथा हो रह गई थी।नहीं भाई, पाप-पुण्यकी समीक्षा मुझसे न होगी।

जज हूं, कानूनकी तराजूकी मर्यादा जानता हूँ। पर उस तराजूकी ज़रूरतको भी जानता हूँ। इसलिए कहता हूँ कि जिनके ऊपर राई-रत्ती नाप-जोखकर पापीको पापी कहकर व्यवस्था देनेका दायित्व है, वे अपनी जानें ।

मेरे बसका वह काम नहीं है । मेरी बु्य पापि्ठा नहीं थीं, यह भी कहनेवाला मै कीन हैं ? पर आज मेरा जी अकेलेमें उन्हीके लिए चार ऑस् बहाता है।

लेखक रघुनाथ देसाई-Raghunath Desai
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 118
Pdf साइज़3.2 MB
Categoryउपन्यास(Novel)

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