स्वामी रामकृष्ण परमहंस | Swami Ramkrishna Paramhans

स्वामी रामकृष्ण परमहंस | Swami Ramkrishna Paramhans Book/Pustak PDF Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

पतन और उत्थान संसार का अटल नियम है। यह केवल व्यक्तियों पर ही नहीं वरन देश, राष्ट्र, समाज, जाति, सभी छोटी बड़ी संस्थाओं पर लागू होता है।

जो जातियाँ किसी समय संसार की स्वामिनी बनी हुई थीं वे ही कुछ समय पश्चात अवनति के गर्त में गिरी हुई दिखाई पड़ती हैं। हमारा देश भी जो महाभारतकाल तक क्रवर्ती पद पर अधिष्ठित था,

तत्पश्चात पारस्परिक वैमनस्य के फल से पतन के मार्ग पर चलने लगा और एक समय ऐसा आया जब वह सब प्रकार से ध्वस्त और त्रस्त होकर विदेशियों का मुखापेक्षी बन गया।

पर भारतीय संस्कृति को यहाँ के प्राचीन ऋषि-मुनियों ने ऐसे सुदृढ़ धार्मिक आधार पर स्थापित किया है कि पतनोन्मुख हो जाने पर भी उसे किसी न किसी रूप में दैवी सहायता प्राप्त होती रहती है,

जिससे यह फिर सँभल कर उत्थान की दिशा में अग्रसर होने लगती है। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए पिछले सौ डेढ़ सौ वर्षों में अनेक दैवीशक्ति संपन्न आत्माओं का प्रादुर्भाव हुआ है।

ऐसे युग परिवर्तनकारी महापुरुषों की कई श्रेणियाँ होती हैं। उनमें बुद्ध और महावीर जैसे राजवंशीय भी पाए जाते हैं और कबीर और रैदास जैसे छोटी जाति के माने जाने वाले भी होते हैं।

जिस प्रकार श्रीकृष्ण जैसे सर्वकला-विशारद, शंकराचार्य तथा चैतन्य जैसे प्रकांड विद्वानों का आविर्भाव हुआ, वैसे ही नामदेव, ज्ञानेश्वर, तुकाराम, मीराबाई आदि अल्पशिक्षित संतों ने भी अपूर्व कार्य करके दिखाए।

इस दृष्टि से विद्या, वैभव, पदवी आदि को महापुरुषों की पहिचान समझना भूल है। कोई नहीं कह सकता कि ईश्वर का विशिष्ट तेज कब, कि जीवात्मा में प्रकट हो उठेगा ? श्री रामकृष्ण परमहंस के चरित्र से इस कथन की सत्यता पूरी तरह सिद्ध होती है।

श्री रामकृष्ण (जन्म सन् १८३६) के पिता श्री खुदीराम चट्टोपाध्याय कामारपुकुर गाँव के रहने वाले एक गरीब व्यक्ति थे। पर वे ऐसे ईश्वर भक्त और सेवाभावी थे कि स्वयं भूखे रहकर भी दीन-दुःखी और अतिथियों की सेवा करने को सदैव प्रस्तुत रहते थे।

लेखक श्री राम शर्मा-Shri Ram Sharma
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 40
Pdf साइज़6.8 MB
Categoryआत्मकथा(Biography)

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