श्री योग अनुभव वाणी | Shri Yog Anubhav Vani PDF

श्री योग अनुभव वाणी – Shri Yog Anubhav Vani Book/Pustak Pdf Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

दुःख आता है सुख देने को मन मूर्ख क्यों घबराता है। जब जौर से गर्मी पड़ती है तो बादल मेह बरसाता है ।॥ दुःख जैसे ही हद पर पहुँचेगा तो फिर वह वापिस जायेगा यानि सुख का आगमन होगा। जैसे तेज गर्मी पड़ती है,

तो वर्षा जरूर | होती है। इसलिए अगर दु:ख के दिन हैं तो सुख के दिन अवश्य आयेंगे। घबराना नहीं चाहिए। हिम्मत से आगे बढ़ते रहना चाहिए। लेना, क्योंकि उसमें उनकी कृपा मिलती है, शक्ति मिलती है।

चाणक्य ने समझाया- चार चिन्ह हैं, चार निशानियाँ हैं, इस शरीर में जो लोग स्वर्ग में रह रहे हैं या जिनके साथ स्वर्ग चल रहा है। पहली निशानी- जो दान करते हैं। दान से मतलब केवल धन ही नहीं देना है।

दु:ख आए तो भगवान का ध्यान जरूर कर सन्त सुखदे सर्वेषामेव दानानां ब्रह्मदानं विशिष्यते! जितने दुनियाँ में दान हैं, उन सबसे अच्छा दान है किसी को ज्ञान देकर, किसी के अज्ञान का हरण करके,

उसके दु:खों को मिटाना। यदि कोई किसी को जोश में होश देकर उसे सन्मार्ग की ओर प्रेरित करते हुए उसे उसकी मंजिल तक पहुंचाने में सफल हो जाता है और सक्षम हो जाता है तो समझ लेना कि ये दान करने

वाला व्यक्ति सबसे बड़ा दानी है।बढ़कर दानी है, दाता हैं और आपका स्थान सबसे बड़ा है। दूसरों पर कृपा करते हुए महान बनो, लेकिन अपना हाथ फेलाकर अपने आपको कभी नीचा मत करो।

देकर अपने सुख को और बढ़ाईये। दूसरों को अच्छे कर्म में प्रवृत करने की कोशिश कीजिए। किसी की भलाई के कार्यों में, सेवा के कार्यों में अपने मन को लगा लें। यह बहुत बड़ा दान है।

लेखक स्वामी अनुभवानंद-Swami Anubhavanand
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 32
Pdf साइज़11 MB
Categoryधार्मिक(Religious)

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