श्री शक्ति गीता | Shri Shakti Geeta

श्री शक्ति गीता | Shri Shakti Geeta Book/Pustak Pdf Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

श्रीमारंतधर्ममटामण्न प्रधान फार्ण्यीज्षय क्रतीपाम के शाखप्रकाश्न विमाग द्वारा अष तक प्रकाशित तीन रीताओं का हिन्दी भनुवाइ सहित प्रकाशन होकर हिन्दीसाहि-‘ त्यभण्डार और साथ ही साध सगातनघर्म्मप्रन्यमण्दार शी श्रीमृद्ध हुई है।

इससे पहले श्रीगुरुगीता सम प्रकार के शुरभकों के लिय श्रीसन्न्यासगीता सव प्रार के सम्म्याप्ती और साधुसम्प्रशयों के लिये और नौसम्प्रदायके लिये सूर्यगीता हिन्दीअनुवादसहित प्रकाशित हो चुकी है ।

अर यह श्रीमतिर्गाता जो अब तक अप्रकाशित थी, हिन्दी अनुवाद सहित प्रकाशित की गई है। सर्वव्यापक, मयजीयहितकमी और पधिपी के सप धम्मों के पितासूप सनातन- धम्म में

निर्गुण और सगुण उपासनारूपले प्रधान दोमेद हैं । यद्यपि लीलाविग्रह अर्थात् अवतार उपासना, कपिदेयतापिनउपासना और क्षद् मासिक शक्तियों की उपासना रूप से सनातन

धर्म में सप अधिकार के उपासकथन्द के लिये और भी कई उपासनाशैलियों का विस्तारित यणन पाया जाताहपान्तु कोलापित्रह उपासना थ्यात् अश्तार- उपासना तो एचसगुणटपामना के अन्तर्गत ही है ।

श्रीमिणुभगकान्, भ्रसुर्थगवान श्रीमगवती देया, श्रीगणेदमगधान् और ग्रीसदाशषिय भगवान् इन पंच सरुणउपीस्य देयताओं में में मुप के ही अवतारों का वर्णन शामों में पाया जाता है

क्योंकि सगुणउपासना की पूर्णत झा लीलामय स्वरूप के विना उपासक अनुभव नहीं कर सकता 1.अस्तु लीलाविप्रह की उपासना सगुण उपासमा को पूर्णता के लिये ही होती है

तथा ऋषिदेवपित उपासमा बीर अन्य क्षुद्र उपासना का अधिकार सकाम राज्य से ही सम्बन्ध रखता हैं। निर्गुण उपासना में सर्वसाधारण का अधिकार हो ही नहीं सकता।

निर्गुण उपासना में सर्वसाधारण का अधिकार हो ही नहीं सकता। निर्गुण उपासना अरूप, भाषातीत, याकु,मन और बुद्धि से अगोचर आत्मस्वरूप की उपासना वे ।

निर्गुण उपासना केवल आत्मान-प्राप्त तत्वज्ञानी महापुरुषों तथा जीवन्मुक्त संन्यासियों के लिये ही उपयोगी समझी जा सकती है और केवल सगुण उपासना ही सब श्रेणी के उत्तम उपासकवृन्द के लिये

लेखक विवेकानंद-Vivekanand
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 182
Pdf साइज़6.4 MB
Categoryसाहित्य(Literature)

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