श्रद्धा पूर्ण ग्रन्थ | Shraddha Purn Granth

श्रद्धा पूर्ण ग्रन्थ | Shraddha Purn Granth Book/Pustak PDF Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

पंच परवाण पंच परधानु | पंचे पावहि दरगहि मानु॥ पंचे सोहहि दरि राजानु ॥ पंचा का गुरु एक धिआनु ॥ जे को कहै करै वीचारु ॥ करते कै करणे नाही सुमारु ॥

धौलु धरम दइआ का पूतु ॥ संतोखु थापि रखिआ जिनि सूति ॥ जे को बुझे होवै सचिआरु | धवलै उपरि केता भारु ।। धरती होरु परै होरु होरु । तिस ते भारु तलै कवणु जोरु ॥

जाति रंगा के नाव ॥ सभना लिखिआ वुड़ी कलाम ॥ एहु लेखा लिखि जाणै कोइ । लेखा लिखिआ केता होइ । केता ताणु सुआलिहु रूप | केती दाति जाणै कौणु कूतु ॥

कीता पसाउ एको कवाउ ॥ तिस ते होए लख दरीआउ । कुदरत कवण कहा वीचारु । वारिआ न जावा एक वार ॥ जो तुधु भावै साई भली कार ॥ तू सदा सलामति निरंकार ॥ १६॥

तीरथु तपु दइआ दतु दानु ॥ जे को पावै तिल का मानु ॥ सुणिआ मंनिआ मनि कीता भाठ॥ अंतरगति तीरथि मलि नाउ । सभि गुण तेरे मै नाही कोई ॥ विणु गुण कीते भगति न होइ ।

सुअसति आथि बाणी बरमाउ ॥ सति सुहाणु सदा मनि चाउ ॥ कवणु सु वेला वखतु कवणु कवण थिति कवणु वारु ॥ कवणि सि रुती माहु कवणु जितु होआ आकारु ॥

वेल न पाईआ पंडती जि होवै लेखु पुराणु ॥ वखतु न पाइओ कादीआ जि लिखनि लेखु कुराणु ॥ थिति वारु ना जोगी जाणै रुति माहु ना कोई ॥ जा करता सिरठी कठ साजे आपे जाणै सोई॥

किव करि आखा किव सालाही किउ वरनी किव जाणा ॥ नानक आखणि सभु को आखै इक दू इकु सिआणा ॥ वडा साहिबु वडी नाई कीता जा का होवै ॥

नानक जे को आपौ जाणै अगै गइआ न सोहै ||२१|| बहुता करमु लिखिआ ना जाइ ॥ वडा दाता तिलु न तमाइ ॥ केते मंगहि जोध अपार | केतिआ गणत नही वीचारु | केते खपि तुटहि वेकार ॥

केते लै लै मुकरु पाहि ।। केते मूरख खाही खाहि । केतिआ दूख भूख सद मार ॥ एहि भि दाति तेरी दातार ॥ बंदि खलासी भाणै होइ ।। होरु आखि न सकै कोइ ॥

जे को खाइकु आखणि पाइ || ओहु जाणै जेतीआ मुहि खाइ ॥ आपे जाणै आपे देइ ॥ आखहि सि भि केई केइ । जिस नो बखसे सिफति सालाह ॥ नानक पातिसाही पातिसाहु ॥ २५ ॥

लेखकमनी सिंह-Mani Singh
भाषाहिन्दी
कुल पृष्ठ114
Pdf साइज़12 MB
Categoryधार्मिक(Religious)

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