ईश्वरकृष्ण की सांख्यकारिका | Sankhyakarika PDF In Hindi

सांख्यकारिका – Sankhyakarika Sanskrit Book Pdf Free Download

सांख्यकारिका प्रश्नोत्तरी

तत्पूर्वरम् अर्थात् स्याप्यव्यापकभावपूर्यनम, लिपिदञ्च बावनीय है। यावृत्तनितीधलिड्गपदेन तिगमस्यास्तीति व्युत्पत्या पक्षधर्मताज्ञानमपि ‘सम्य’ भरति-तथा च व्याप्यव्यापरभावपूर्वकरवे, सति पथयर्मताशानपूर्वकवम्, बनुमानसामान्यलक्षणम् ।

आफ्नय निकबाप्तानाम्-वेदप्रामाण्याभ्युपगन्तृगाम, श्रुति = पवणे िदयजन्य-शब्दज्ञानम् तथा चबानपुरुषोच्चरितगगाजन्य वाक्यार्थशानत्यम् । बाप्तवचनम् अर्थात् शब्दप्रमाणसामान्पलक्षणम् ।हिन्दी-पाध्ययालो न प्रनिविषय अर्थात अथसनिकृष्ट इन्द्रिय से होते |

वाले अध्यवसाप ( मृत्तिरप ज्ञान ) बो हो प्रत्यक्ष प्रमाण माना है। उनरा अभिप्राय यह है कि पट-पट बादि विषयों के साथ इन्द्रियों का सम्बन्ध होने पर बुधि के तभोगुणरप आवरण का भग होता है और फिर सरवगुण स्वरूप प्रकाश | का आविर्भाव होना है और उगरे पश्चात् घटारारतिरूप यध्यरसाय (निश्चयात्मजयक्ति रा उदय होता है,

वही निश्वयारिनना अन्त करण (युटि) की वृत्ति ‘अय पट ” इस प्रमा्ञानस्वरूप पौठपेय बोध का कारण होने से प्रमाण बनती है ।साम्पमत में अनुमान के स्वरूप का “लिङ्गनिगपूर्वकम्” कहकर ाब्दिक भेद मरम्प कर दिया है परन्तु आर्थिक स्वस्य अनुमान का यही है जो कि मंगायिकी ने माना है

कि भ्याप्तिविधिष्टपसाधर्मताहान’ । योर इसी अर्थ में मे “लिङ्गलिडिपूर्वक का पर्यदथान भी रिया है।और वह भनुमान-(१ 1 पूर्ववत् (२) गेपयद् (१) सामान्यतः दृष्ट- इरा रूप से तीन प्रसार रा है।

कारण रे रा होनेवाने नार्यानुमान को पूर्ववत् अनुमान महा रादरी से भाष्छा दित आराश को देख कर तथा रिजरी भी रडाहट को सुनकर भाविन तीन यूपटूप कार्य का अनुमान होना है।

यवत-परत् अनुमा दोनों लिंगों से शून्य हो बयात् जहां हेतु में साध्य की व्याप्ति सामान्य रूप से दृष्ट हो चुकी हो । जैसे चक्षुः प्रमाणं प्रमाचनकत्वाद श्रोत्रवत् ।

आप्तवचनम् यहां पर आप्तवचन यह लक्ष्य है और आप्त श्रुति यह क्षण है । अर्थात् आप्तपुरुष के द्वारा उच्चरित यथार्पवानय से उत्पन्न वाफ्यार्थज्ञान को हो शरदप्रसाच कहा है ।

बता वेदभूति- स्मृति- इतिहासा-पुराण- धर्मशास्त्र एवं सामान्यशास्त्र आदि के बायो में उत्पन्न हुए शानों का भी शस्यप्रमाण में ही अन्तर्भाव हो जाता है |

लेखक ज्वालाप्रसाद गौड़-Jwalaprasad Gaud
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 144
Pdf साइज़2.6 MB
Categoryधार्मिक(Religious)

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