साधना कल्पतरु | Sadhna Kalpataru

साधना कल्पतरु | Sadhna Kalpataru Book/Pustak Pdf Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

श्रीरामचन्द्रजीकी सारी ही चेष्टाएँ धर्म, ज्ञान, नीति, शिक्षा, गुण, प्रभाव, तत्त्व एवं रहस्यसे भरी हुई हैं। उनका व्यवहार देवता, ऋषि, मुनि, मनुष्य, पशु, पक्षी आदि सभी के साथ बहुत ही प्रशंसनीय, अलौकिक और अतुलनीय है।

देवता, ऋषि, मुनि और मनुष्योंकी तो बात ही क्या-जाम्बवान्, सुग्रीव, हनुमान् आदि रीछ-वानर; जटायु आदि पक्षी तथा विभीषण आदि राक्षसोंके साथ भी उनका ऐसा दयापूर्ण,

प्रेमयुक्त और त्यागमय व्यवहार हुआ है कि जिसे स्मरण करनेसे ही रोमाञ्च हो आता है। भगवान् श्रीरामकी कोई भी चेष्टा ऐसी नहीं, जो कल्याणकारिणी न हो।

उन्होंने साक्षात् पूर्णब्रह्म परमात्मा होते हुए भी मित्रोंके साथ मित्र का- सा, माता-पिताके साथ पुत्रका-सा, स्त्रीके साथ पतिका-सा, भाइयोंके साथ भाईका-सा, सेवकोंके साथ स्वामीका-सा,

मुनि और ब्राह्मणोंके साथ शिष्यका-सा-इसी प्रकार सबके साथ यथायोग्य त्यागयुक्त प्रेमपूर्ण व्यवहार किया है। अतः उनके प्रत्येक व्यवहारसे हमलोगोंको शिक्षा लेनी चाहिये ।

श्रीरामचन्द्रजीके राज्यका तो कहना ही क्या है, उसकी तो संसारमें एक कहावत हो गयी है। जहाँ कहीं सबसे बढ़कर सुन्दर शासन होता है, वहाँ ‘रामराज्य’ की उपमा दी जाती है।

श्रीरामके राज्यमें प्रायः सभी मनुष्य परस्पर प्रेम करनेवाले तथा नीति, धर्म, सदाचार और ईश्वरकी भक्तिमें तत्पर रहकर अपने-अपने धर्मका पालन करनेवाले थे। प्रायः सभी उदारचित्त और परोपकारी थे।

वहाँके प्रायः सभी पुरुष एकनारीव्रती और अधिकांश स्त्रियाँ पतिव्रत-धर्मका पालन करनेवाली थीं भगवान् श्रीरामका इतना प्रभाव था कि उनके राज्यमें मनुष्योंकी तो बात ही क्या,

पशु-पक्षी भी प्रायः परस्पर वैर भुलाकर निर्भय विचरा करते थे। भगवान् श्रीरामके चरित्र बड़े ही प्रभावोत्पादक और अलौकिक थे। यह हमारे आर्य पुरुषोंका स्वाभाविक ही व्यवहार था ।

इसी आदर्शको हिंदू संस्कृति कहते हैं। जटायु आदि पक्षी तथा विभीषण आदि राक्षसोंके साथ भी उनका ऐसा दयापूर्ण, प्रेमयुक्त और त्यागमय व्यवहार हुआ है कि जिसे स्मरण करनेसे ही रोमाञ्च हो आता है।

लेखक जयदयाल गोयेंदका-Jaydayal Goendka
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 2175
Pdf साइज़300.1 MB
Categoryसाहित्य(Literature)

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