साधना काव्य संग्रह | Sadhana

साधना काव्य संग्रह | Sadhana Book/Pustak Pdf Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

उनकी रचनाओं में द्विवेदी युगीन बोध और छायावादी नवीनता, दोनों की झलक स्पष्ट है। ‘लली’ जी के मानस पटल पर युग-जीवन के आघात प्रत्याघात का जो स्पन्दन अंकित हुआ है,

उसकी सफल तथा सशक्त अभिव्यक्ति उनके काव्य में हुई हैं। उन्होंने जीवन में हर्ष और विषाद की विभिन्न अवस्थाओं का गहराई से अनुभव किया तथा इन अनुभूतियों के कारण उनके काव्य में दार्शनिकता का पुट भी आ गया है।

‘लली’ जी के पूर्वज दिलवल, जिला उन्नाव (उत्तर प्रदेश) के निवासी थे। इनके पिता पं० कन्हैयालाल तिवारी आर० एम० एस० में सेवारत थे और इसी संदर्भ में वे कुछ समय तक बड़ौदा के पास मेहसाना नामक स्थान में भी रहे।

मेहसाना प्राकृतिक दृष्टि से सुरम्य स्थान है और वहाँ तोरन वाली माता (देवी) का प्रसिद्ध मन्दिर है। ‘लली जी के पिता तोरन देवी के भक्त थे, इसी कारण उन्होंने अपनी पुत्री का नामकरण देवी के नाम पर ही किया।

‘लली’ जी का जन्म अपनी ननिहाल, ग्राम पिपरिया, जिला जबलपुर (मध्य प्रदेश) में श्रावण सुंदी 12 सम्वत् 1953 वि० को हुआ। इनकी सम्पूर्ण शिक्षा घर पर ही हुई।

इनके माता-पिता, मामा तथा नाना ने इनकी साहित्यिक प्रतिभा के विकास में विशेष रुचि ली। आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी ने भी इन्हें प्रोत्साहित किया। पं० श्रीधर पाठक इनकी समस्या पूर्तियों से बड़े प्रभावित थे।

‘रसिक मित्र’, ‘साहित्य सरोवर’, ‘प्रियम्वदा’, ‘रसिक रहस्य’, ‘गृह लक्ष्मी’, ‘स्त्री दर्पण, मर्यादा’, ‘अभ्युदय’, ‘प्रताप’, ‘सरस्वती’, ‘भारतभगिनी’, ‘जाह्नवी’ तथा ‘कान्यकुब्ज आदि पत्र-पत्रिकाओं में इनकी रचनायें समय-समय पर प्रकाशित होती रहीं।

इन्होंने कुछ समय तक लखनऊ से प्रकाशित होने वाली ‘त्रिवेणी’ नामक मासिक पत्रिका का सम्पादन भी किया। संइनके माता-पिता, मामा तथा नाना ने इनकी साहित्यिक प्रतिभा के विकास में विशेष रुचि ली। आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी ने भी इन्हें प्रोत्साहित किया।

लेखक तोरण देवी शुक्ल-Toran Devi Shukla “Lali”
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 95
Pdf साइज़3.2 MB
Categoryकाव्य(Poetry)

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