श्री हनुमान कथा | Sri Hanuman Katha

श्री हनुमान कथा | Sri Hanuman Katha Book/Pustak Pdf Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

ये चौपाइयां उस प्रसंग की हैं जब भगवान् लंका-विजय का संकल्प कर चले हैं और सागर के किनारे पहुँचे हैं। प्रभु सागर के किनारे विराजमान हैं। चार सौ कोस का विशाल अथाह सागर हिलोरें मार रहा है।

प्रभु थोड़े से चिन्तातुर भाव में हैं। बैठे-बैठे प्रभु सोच रहे हैं कि अब सागर कैसे पार हो? प्रभु ने बाँये देखा, दाँये देखा। एक ओर सुग्रीवजी विराजमान हैं तथा एक ओर लंकाधिपति विभीषण महाराज विराजमान हैं।

श्री हनुमानजी सेवा में हैं। लक्ष्मण जी रक्षा में खड़े हैं। प्रभु ने सबको देखा और प्रश्न किया? प्रभु ने चिंता के भाव से पहले सुग्रीवजी की ओर निहारा, सुन कपीस! हे कपियों के ईश्वर हे सुग्रीव जी!

फिर लंकाधिपति महाराज विभीषण की ओर देखकर कहा है, हे लंकाधिपति! और यह ‘बीरा’ गोस्वामीजी ने शायद हनुमानजी के लिए संकेत किया है ।

हे वीर हनुमान् जी ‘केहि विधि तरिअ जलधि गम्भीरा’ इतना गहरा सागर! अथाह दूर-दूर तक अनन्त जलराशि और इसके अन्दर अनेक कुलसहित भयानक जलचर “संकुल, मकर उरग झष जाती” इसको कैसे पार करें?

“केहि विधि तरिअ?” इसको कैसे पार करें? बड़ा गम्भीर प्रश्न प्रभु ने उपस्थित किया। मुझे ऐसा लगता है कि भगवान् को ये सागर पार करना क्यों कठिन लगता है?

जिसका नाम भवसागर पार कराता हो और जिसका काम भवसागर पार कराना हो उसको यह सामान्य सागर पार करने के लिए चिन्तातुर होना पड़ा, ये शायद लीला का दृश्य है।

सच तो यह है कि भगवान् यह प्रश्न हम सबके पार होने के लिए कर रहे थे। हम सब भवसागर में डूबे हैं और जितने इस क्रूज, इस विशाल जहाज की यात्रा पर आए हैं वो दो-दो महासागरों में डूबे हैं।

भवसागर में पहले से डूबे थे, प्रशान्त महासागर में अब आकर खड़े हो गए। मीलों दूर जहाँ तक दृष्टि जाती है, वहाँ तक अथाह सागर हिलोरें मारता हुआ ऐसा नील वर्ण लगता है जैसे आकाश-भूतल पर अवतरित हो गया हो।

तो प्रभु ने जब सबकी ओर देखा, सबने अपने-अपने अनुसार, अपनी मति के अनुसार, बुद्धि के अनुसार कहा भगवन्! यह सागर आपका कुलगुरु है, इसकी विनय-प्रार्थना करें, हाथ जोड़कर इससे मार्ग की कामना करें, यह हमको मार्ग देगा।

प्रभु को तो अच्छा लगा, लेकिन लक्ष्मणजी को अच्छा नहीं लगा।

लेखक विजय कौशल-Vijay Kaushal
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 251
Pdf साइज़39 MB
Categoryधार्मिक(Religious)

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