श्री प्रेम सुधा सागर | Shri Prem Sudha Sagar PDF In Hindi

श्री प्रेम सुधा सागर | Shri Prem Sudha Sagar Book/Pustak PDF Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

सहयोग दो ॥ २२ ॥ वसुदेवजीके घर खय पुरुषोत्तम है भगवान् प्रकट होंगे। उनकी और उनकी प्रियतमा = (श्रीराधा)की सेवाके लिये देवाङ्गनाएँ जन्म प्रहण करें । २३॥ = खयंप्रकाश भगवान् शेष भी,

जो भगवान्की कला होनेके = कारण अनन्त हैं (अनन्तका अंश भी अनन्त ही होता ५ है) और जिनके सहन मुख हैं, भगवान्के प्रिय कार्य व करनेके लिये उनसे पहले ही उनके बड़े भाईके रूपमें भ अवतार प्रमाण करेंगे॥

मंगवाने वह ऐश्र्य- व शालिनी योगमाया भी, जिसने सारे जगत्को मोहित कर रक्खा है, उनकी आज्ासे उनकी लीलाके कार्य सम्पन्न हे करनेके लिये अशरूपसे अवतार ग्रहण करेगी ॥२५॥

श्रीशुकदेवजी कहते हैं-परीक्षित् ! प्रजापतियोंके श्रीशुकदेवजी कहते है-परीक्षित् ! प्रजापतियोंके खामी भगवान् ब्रह्माजीने ढेक्ताओंको इस प्रकार आज्ञा दी और पृथ्वीको समझा-बुझाकर ढाढ़स बँधाया ।

इसके बाद वे अपने परम धामको चले गये ॥ २६ ॥ प्राचीन कालमे यदुवंशी राजा थे शूरसेन । वे मथुरापुरीमें रहकर माथुरमण्डल और शूरसेनमण्डलका राज्यशासन करते थे । ॥२७॥

उसी समयसे मथुरा ही समस्त यदुवंशी नरपतियों की राजधानी हो गयी थी। भगवान् श्रीहरि सर्वदा वहा = विराजमान रहते हैं ॥ २८॥ एक बार मथुरामें शूरके है पुत्र वसुदेवजी विवाह करके अपनी नवविवाहिता

पत्नी में देवकीके साथ घर जानेके लिये रयपर सवार हुए॥२९॥ उग्रसेनका लडका या कस । उसने अपनी चचेरी बहिन एक बार मथुरामें शूरके पुत्र वसुदेवजी विवाह करके अपनी नवविवाहिता पत्नी देवकीके साथ

जानेके लिये रयपर सवार हुए ॥२९॥ उग्रसेनका लडका था कस | उसने अपनी चचेरी बहिन देवकीको प्रसन्न करनेके लिये उसके रयके घोडौंकी रास पकड़ ली। वह खयं ही रथ हाँकने लगा,

यद्यपि उसके साथ सैकड़ों सोनेके बने हुए रय चल रहे थे । ३० ॥ देवकीके पिता थे देयक । अपनी पुत्रीपर उनका बड़ा प्रेम था ।

कम्माणी यब में ने समा इ आदि कि साथ देवकीका झपष और तुम मन्दमानाकी पत्नी यशोदाकै गास बना लेना ॥रा तुमको मुंह मांगे मरदान देनेगें समर्थ होलोगी। मनुम तुम्हें अपनी समक्षा पसिनाकोको पूर्वी करने- बी जामकर धूप-दीप, नैवेध

एवं व्य प्रकारी साममियोशे गुम्बारी पूजा करेंगे। १.पुग्धीमे खोग तुम्हारे हिने त्यस स्थान बनायेंगे और दुर्ग, बाली, विनय, वैष्णवी, कुमदा, अनामिका, कर्ण, माधनी, कन्या, माण, नारायणी, ईशानी, शारदा मोर गाविस पदि बहुत से नामोसे पुषारेंगे ॥ ११-१२ ॥

लेखक हनुमान प्रसाद-Hanuman Prasad
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 344
Pdf साइज़13.7 MB
Categoryधार्मिक(Religious)

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