ऑडिया जगमोहन दाण्डी रामायण | Odia Jagmohan Dandi Ramayan

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पुस्तक का एक मशीनी अंश

ओड़ीसा के पंचसखा साधक मत्त बलरामदास और उनकी जगमोहन अथवा दाण्डि रामायण

जिस प्रकार उत्तर भारत में गोस्वामी तुलसीदास के “रामचरितमानस” का घर-घर में प्रचार है। वही स्थिति ओड़ीसा में भक्त शिरोमणि बलराम दास जी की जगमोहन रामायण की है।

रामचरित मानस की रचना १५७४ ई० में हुई, जबकि भक्त बलरामदास-कृत जगमोहन रामायण की रचना पन्द्रहवीं शताब्दी के शेषार्द्ध में हो चुकी थी।

उन्होंने विश्व विख्यात् पुरुषोत्तम क्षेत्र के श्री जगन्नाथ मंदिर के जगमोहन में बैठकर उनकी ही बाजा से इसकी रचना की। इसी कारण इसका नाम जगमोहन रामायण पड़ा।

यद्यपि रामायण के आराध्य देव श्री रामचन्द्र जी हैं। परन्तु इस कवि ने सर्वप्रथम अपने इष्ट श्री जगन्नाथ जी की वन्दना करते हुये रामायण की रचना की। मत्त बलरामदास केवल ओड़ीसा के सिद्ध साधकों द्वारा सम्मानित ही नहीं हुए,

अपितु उस समय के अन्य धर्म मतावलम्बी प्रेमावतार श्री चैतन्य महाप्रभु के द्वारा अभिनंदित भी हुए थे। मध्ययुगीन ओड़िआ साहित्य में सिद्धसाधक तथा साहित्यिक पंचसखाओं में वयोवृद्ध एवं ज्ञान मार्ग के समर्थ साधक श्री बलरामदास जी थे।

श्री शारलादास की महाभारत अथवा श्री जगन्नाथ दास की भागवत के समान ही जोड़ीसा में जगमोहन रामायण सर्वत्र सुपरिचित है। यद्यपि इसमें शारलादास कृत महाभारत के महासागर में उठती हुई

उत्ताल तरंगों के दर्शन नहीं होते या फिर जगन्नाथदास की भागवत् का तत्व मार्मिक गाम्भीयं भी नहीं किन्तु सरल भाषा में लीलाओं की तरंग मालाओं का दर्शन पाठकों को हो जाता है ।

इसी कारण मध्ययुगीन ओड़िआ साहित्य में इसका स्वतन्त्र स्थान है। परमब्रह्म परमात्मा भगवान विष्णु के दस अवतारों में श्रीराम का अवतार अनन्यतम है।

नेतायुग में राक्षसों के उपद्रवों से मुनियों की यज्ञ रक्षा करने के लिये तथा दुष्टों का विनाश करके साधु-सन्तों की रक्षा करते हुये लोक में धर्म की स्थापना के लिये श्री राम का अवतार हुआ था।

लेखक बलराम दास-Balram Das
भाषा हिन्दी, ऑडिया
कुल पृष्ठ 1196
Pdf साइज़33.6 MB
Categoryसाहित्य(Literature)

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