नवरात्रि हवन मंत्र पूजा विधि | Navratri Havan Mantra Pooja Vidhi PDF

नवरात्रि हवन मंत्र पूजा विधि – Navratri Havan Mantra Pooja Vidhi Book/Pustak PDF Free Download

जाने घट स्थापना का शुभ मुहूर्त (Navratri Ghat Sthapna Mahurat)

नवरात्रि का पर्व शुरू हो रहा है। पंचांग के अनुसार इस दिन आश्विन मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि रहेगी। इस दिन घट स्थापना मुहूर्त का समय सुबह 06 बजकर 27 मिनट से 10 बजकर 13 मिनट तक रहेगा।

घटस्थापना के लिए अभिजित मुहूर्त सुबह 11 बजकर 44 मिनट से 12 बजकर 29 मिनट तक रहेगा।

मंत्र

ओम गणेशाय नम: स्वाहा

ओम गौरियाय नम: स्वाहा

ओम नवग्रहाय नम: स्वाहा

ओम दुर्गाय नम: स्वाहा

ओम महाकालिकाय नम: स्वाहा

ओम हनुमते नम: स्वाहा

ओम भैरवाय नम: स्वाहा

ओम कुल देवताय नम: स्वाहा

ओम स्थान देवताय नम: स्वाहा

ओम ब्रह्माय नम: स्वाहा

ओम विष्णुवे नम: स्वाहा

ओम शिवाय नम: स्वाहा

नवरात्रि के लिए पूजा सामग्री (Navratri Poojan Samagri)

नवरात्रि के व्रत रखने और पूजा करने का तभी लाभ होता है जब सब कार्य विधिपूर्वक किये जाएं। आज हम आपको नवरात्रि के लिए पूजा सामग्री बता रहे है।

इसके लिए आ पको मां दुर्गा की नई तस्वीर, लाल चुत्री, लाल कपड़ा, गंगा जल, माता का श्रृंगार, आम की पत्तियां, लौंग का जोड़ा, उपले, जी के बीज, चंदन, नारियल, कपूर, गुलाल, पान के प ते, सुपारी ओर इलायची की आवश्यकता होती है।

घर पर नवरात्रि पूजा विधि (Navratri Ghat Sthapna Pooja Vidhi)

नवरात्रि में सुबह जल्दी उठना चाहिए और नित्यकर्म और स्रान करने के बाद साफ कप ड़े पहने और पूजा घर को साफ करें।

इसके बाद नवरात्रि में मां दुर्गा की आराधना कर ने से पहले सभी तरह की पूजा सामग्रियों को एक जगह एकत्रित कर लें। इसके बाद मां दुर्गा की फोटो को लाल रंग के कपड़े में रखें।

फिर पूजा की थाली को सजाएं उसमें स भी तरह की पूजा सामग्री को रखें मिट्टी के पात्र में जो के बीज को बोएं और नौ दिनों त क उसमें पानी का छिड़काव करें।

नवरात्रि के पहले दिन यानी प्रतिपदा तिथि पर शुभ मुहूर्त में कलश को लाल कपड़े में लपटेकर स्थापित करे। कलश में गंगाजल डाले और आम की पत्तियां रखकर उस पर जटा नारियल रखें।

नवरात्रि में माँ दुर्गा के नौ रूपों की पूजा का विधान (Nav Durga ke Nav Roop)

दिन 1

मां शैलपुत्री पूजा घटस्थापना- यह देवी दुर्गा के नौ रूपों में से प्रथम रूप है। मां शैलपुत्री चंद्रमा को दर्शाती है और इनकी पूजा से चंद्रमा से संबंधित दोष समाप्त हो जा ते हैं।

शैलपुत्री माता पार्वती का ही दूसरा रूप है। इन्हें हिमालय राज की पुत्री कहा जा ता है। इनके दाएं हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल होता है तथा यह मां नंदी की सवारी करती है। शक्ति और कर्म इनके प्रतीक है।

दिन 2

माँ ब्रह्मचारिणी पूजा :ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार देवी ब्रह्मचारिणी मंगल ग्रह को नियंत्रित करती हैं। देवी की पूजा से मंगल ग्रह के बुरे प्रभाव कम होते हैं।

ऐसा कहा जाता है कि जब मां पार्वती अविवाहित थी तब उन्हेंब्रह्मचारिणी कहा जाता था। यानि कि यह दिन भी मां पार्वती का ही होता है।

ये मां श्वेत वस्त्र धारण किए हुए होती हैं और इनके दाएं हाथ में कमण्डल और बाएं हाथ में जपमाला होती है। देवी का स्वरूप अत्यं त तेज़ और ज्योतिर्मय है। ये मां शांति और सकारात्मकता की प्रतीक है।

दिन 3

माँ चंद्रघंटा पूजा देवी चंद्रघण्टा शुक्र ग्रह को नियंत्रित करती है। देवी की पूजा से शुक्र ग्रह के बुरे प्रभाव कम होते हैं।

पौराणिक कथा के अनुसार ऐसा माना जाता है कि माँ पार्वती और भगवान शिव के विवाह के दौरान उनका यह नाम पड़ा था। मां चंद्रघण्टा का प्रिय रंग पीला होता है इसलिए इस दिन पीले रंग धारण किए जाते हैं। यह रंग साह सका प्रतीक है।

दिन 4

माँ कूष्मांडा पूजा :र्मा कूष्माण्डा सूर्य का मार्गदर्शन करती है अतः इनकी पूजा से सूर्य के कुप्रभावों से बचा जा सकता है। मां कुष्मांडा शेर की सवारी करती है और उनकी आठ भुजाएं होती हैं।

ऐसी मान्यता है कि पृथ्वी पर होने वाली हरियाली माँ के इसी रूप के कारण है। इस दिन हरे कपड़े पहनने को शुभ माना जाता है।

दिन 5

माँ स्कंदमाता पूजा देवी स्कंदमाता बुध ग्रह को नियंत्रित करती है। देवी की पूजा से बु ध ग्रह के बुरे प्रभाव कम होते हैं। भगवान कार्तिकेय का एक नाम स्कंद भी है।

इनकी चार भुजाएं होती हैं। माता अपने पुत्र को लेकर शेर की सवारी करती है। इस दिन ग्रे रं ग के कपड़े पहनने की मान्यता है।

दिन 6

माँ कात्यायनी पूजा देवी कात्यायनी बृहस्पति ग्रह को नियंत्रित करती हैं। देवी की पूजा से बृहस्पति के बुरे प्रभाव कम होते हैं। माता कात्यायिनी साहस का प्रतीक हैं।

ये शेर की सवारी करती है और उनकी चार भुजाएं है। इस दिन केसरिया रंग का महत्व होता है।

दिन 7

माँ कालरात्रि पूजा देवी कालरात्रि शनि ग्रह को नियंत्रित करती है। देवी की पूजा से शा नि के बुरे प्रभाव कम होते हैं और ऐसा कहा जाता है कि जब मां पार्वती ने शुभ निशुभ नामक दो राक्षसों का वध किया था तब उनका रंग काला हो गया था।

इसके बा वजूद इस दिन काले के बजाय सफेद रंग पहना जाता है।

दिन 8

माँ महागौरी पूजा देवी महागौरी राहु ग्रह को नियंत्रित करती हैं। देवी की पूजा से राहु के बुरे प्रभाव कम होते हैं। माता का यह रूप शांति और ज्ञान की देवी का प्रतीक है। इस दिन पिंक कपड़े पहने जाते हैं।

दिन 9

माँ सिद्धिदात्री पूजा देवी सिद्धिदात्री केतु ग्रह को नियंत्रित करती हैं। देवी की पूजा से केतु के बुरे प्रभाव कम होते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से पूजा करने वा तों को सिद्धि प्राप्त होती है।

मां सिद्धिदात्री कमल के फूल पर विराजमान हैं और उन की चार भुजाएं होती है।

9 दुर्गा के बीज मंत्र (Nav Durga Beej Mantra)

नवरात्रि के समय में मां दुर्गा के बीज मंत्रों का जाप कल्याणकारी और प्रभावी माना जा ता है। इस नवरात्रि आप 9 दुर्गा के बीज मंत्रों का जाप कर सकते हैं।

इसमें शब्दों के उ च्चारण का विशेष ध्यान रखा जाता है। आइए मां दुर्गा के 9 स्वरूपों के बीज मंत्रों के बारे में जानते हैं।

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भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 33
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CategoryReligious

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