कृष्णालीला | Krishna Leela Ka Chintan PDF In Hindi

कृष्णालीला का चिन्तन – Krishna Leela Ka Chintan Book/Pustak Pdf Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

व्रजेन्द्रगेहिनी यशोदा नेत्र निमीलित किये मणिमय दीवालके सहारे चुपचाप निस्पन्द बैठी हैं श्रीरेहिणीजीकी आँखें भी बंद हैं।

अन्य समस्त परिचारिकाएँ भी निद्राभिभूत होकर बाह्यज्ञानशून्य हो रही हैं इसलिये दिव्य नराकृति परब्रह्मको सूतिकागारमें पदार्पण करते तो किसीने नहीं देखा,

पर उनके आते ही समस्त सूतिकागार एक अभिनव चिन्मय रससे प्लावित हो गया, वहाँका अणु-अणु उस रसमें निमग्न हो गया।

व्रजमहिषीकी लीलाप्रेरित प्रसव-वेदनाजन्य मूर्छा, रोहिणी तथा परिचारिकाओंकी योगमायाप्रेरित तन्द्रा एवं निद्रा भी उस रसके स्पर्शसे चिन्मय भावसमाधि मा बन गयी।

यशोदाके क्रोडसे संलग्न सच्चिदानन्दकन्द श्रीहरि शिशुरूपमें अवस्थित हैं। कदाचित् अनन्त सौभाग्यवश वि कोई कवि दिव्यातिदिव्य नेत्र पाकर उस क्षणकी ज शोभाका अनुभव करता, अनुभवको वाणीसे व्यक्त करनेकी शक्ति पाता,

तो वह इतना ही कह सकता मानो चिदानन्द-सुधा-रस-सरोवरमें अभी-अभी एक अद्भुत अपूर्व नवीनतम नीलपद्म प्रस्फुटित हुआ हो अन्तर्यामी यदि न बोलते तो पता नहीं, शिशुरूप श्रीहरिको वात्सल्य-रस-पानके लिये कितनी देर और रोना पड़ता; क्योंकि रोहिणीजी तो आनन्दमें बेसुध हैं,

उनमें समयोचित आदेश देनेकी शक्ति सर्वथा लुप्त हो चुकी है! अस्तु,इस आदेशने परिचारिकाओंके अन्तर्हदयमें बहते हुए आनन्दस्रोतको तरङ्गित कर दिया। फिर क्या था, दूसरे ही क्षण सूतिकागार आनन्द-कोलाहलसे मुखरित हो उठा। साथ ही जो करना था,

उसमें सभी जुट पड़ीं। एक व्रजेश्वरको सूचना देने गोष्ठकी ओर दौड़ी, एक दाईको बुलाने गयी, एक उपनन्द-पत्नीको परम शुभ समाचार देकर क्षणोंमें ही लौट आयी,

एक सहनाईवालेके घर जा पहुँची, और एक बावली- सी विविध अनर्गल आनन्दध्वनि करती हुई समस्त व्रजपुरमें सूचना देती हुई दौड़ने लगी। यह सब हो रहा है.

पर सूतिकागारमें राजेश्वरी तो अभी भी किसी अनिर्वचनीय भावसमाधिमें निमम्र हैं।इस आदेशने परिचारिकाओंके अन्तर्हदयमें बहते हुए आनन्दस्रोतको तरङ्गित कर दिया।

फिर क्या था, दूसरे ही क्षण सूतिकागार आनन्द-कोलाहलसे मुखरित हो उठा। साथ ही जो करना था, उसमें सभी जुट पड़ीं।

इस आदेशने परिचारिकाओंके अन्तर्हदयमें बहते हुए आनन्दस्रोतको तरङ्गित कर दिया। फिर क्या था, दूसरे ही क्षण सूतिकागार आनन्द-कोलाहलसे मुखरित हो उठा। साथ ही जो करना था, उसमें सभी जुट पड़ीं।

लेखक Gita Press
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 504
Pdf साइज़108.4 MB
Categoryधार्मिक(Religious)

कृष्णालीला का चिन्तन – Krishnalila Book Pdf Free Download

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