हिंदी भाषा का व्याकरण | Hindi Bhasha Ka Vyakarn

हिंदी भाषाका व्याकरण | Hindi Bhasha Ka Vyakarn Book/Pustak Pdf Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

डस्पा गरथथत भारत बर्यके उम्र ब्चिम मंदेशीय लेगों सी के नीका नाम हिन्दीभाषाहै । बहत प्राचीन समयमे भारतवर्ष के – वशीयलागकी भाषा संस्कवर्यी । वसी सस्कृतभाषाका काल कमसे अपर्भसहोकर प्राक्तभाषाङुई,

नोकि विज्रमादित्यके सम येभ वाली जाती थी। प्राकृत भाई बदल ती वरती हिन्दी व नगई। 1. मुसलमानों के इस देशमे श्रानेसे हिन्दी के साधथ श्र कार सीके श- इ मिलकर एक और उहू भाषा होगई। श्रवशड दिन्दीमे उड़हेने

केवल इतनाडि प्रभेदंदे वि शे्चीकरम जे। शद्दग्रावश्यक होते हैं वे संस्कृत से लिये जाते हैं यैर शेये करणे जे। श्रावश्पकहोते है वे श्रवी फ़ारसीसानयेज्ञे हैं, व्याकसण देनों की शाय एकरिंटे बाकरण विनाका भाया नियम बनहिं होती।

जिसभायामे वि विधविद्यागीकी पर्नकें रचीनादे उसकी व्याकरण आगे चाहिये । हिन्दी भाषाम विद्या की उन्नति की श्रत्यन्त श्रावश्यक ताहै इसनिमि उके याकरण की भी आवश्यकता है।

हिन्दी भाषाके रो तीन व्याकरण, यथा श्रादम साहब की याकर भाकषा चन्दस्य ग्रेर उत्रह मार्त गाड । वन्ेसे शषमा करमे यदाय पि हिन्दी शाहों के रूप सिद्ध डपके वस्तनः उस्का उद्देश्य उड़ भाषा के नियम ज्ञापनसे है,

इसलिये हिन्दी के यथार्थ याकररोगं की गिनीमे से उसे निकान्तरेना चाहिये । प्रवशिष्ट व्याकरणसभी हिन्दी के आकर का सारा उटेश्पशिदध नकि है।ता। केयरकि श्राহम साइब की व्याकर गरेजी व्याकरण के नमने परेहे

झतप हिन्दीभाषाके नियमों को स्वाभाविक रीतिस इसेम वर्णन न किया गया । भावाचन २ययाकरण वा काशके कई द्यम्य रदनेसे यी छे तरनसार कोई व्याक सावा काशनाना जैसा सहज है,नया बाकरण वा कोश बनाना वैसा सहज नहिं ।

किसी भाषाकी याकरण प्रयम वनानी बड़े कट गर विवेचनासाय्यंहै, इस निमित्न उसेस को ईदे। जानाभी ग्रसम्भव नदि । ऊपर कह चुके कि यद व्याकरण सं र नई रीतिसे दनादे, पहातक कि मर नित दिन्दी आ् औरत से इस्ले कुछ सहायता नहिंलीगई।

लेखक नवीनचंद्र राय-Navinchandra Rai
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 116
Pdf साइज़9.5 MB
Categoryसाहित्य(Literature)

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