रामानुजाचार्य का जीवन चरित | Ramanujan Biography Hindi PDF

रामानुजाचार्य का जीवनी – Biography of Ramanujan Book PDF Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

पक्षिकुलके मधुर कलरवसे मानो वह स्थान बोल रहा है, खिले हुए पुष्पोंके सौरभसे वह स्थान सुरभित हो रहा है। शान्ति, मधुरता और सुन्दरताको वहाँ सीमा नहीं। देखने से मालूम होता है कि ससारको रक्षामे निरन्तर लगे रहने के कारण परिश्रम

दूर करनेके लिये स्वय भगवान् कमळापति अपने प्रियतम मत के साथ विधाम करने के लिये आये हैं।लगभग हजार वर्ष पहले आसूरि केशवाचार्य नामक एक कर्मनिष्ठ ब्राह्मण इस गांव में रहते थे। उसी समय यमुनाचार्य अधवा आलवन्दार

राजसिंहासन छोड़कर और राननिय स्वानोजी के शिष्य होकर श्री रगकषेत्रमे सम्यातसति नेशन रहते थे। गुरुको बैकुम्छ -प्रा्ति होनेपर आलवन्दार ही उस समयकी समस्त वैष्णव-मण्डलीके नेता नाने गये ।

उनका असाधारण बैरामा, त्याग, पाण्डित्य, नम्रता, कर्मनिष्ठा आदि सभी गुण दैष्णव-मण्डलीके लिये अनुकरणीय हो गये। उनके बनाये सुमधुर स्तोत्रीको सभी सज्जन कण्ठस्थ और इृदयस् करके अपने को कतकत्य मानने लगे ।

पस्तुत महारमा यामुनाचायने अपने बनाये स्तोत्रमें इस प्रकार भक्ति और प्रीति के साथ सरल भावसे आत्मनिवेदन किया है, जिसे पढकर पाखण्डियोके हृदयमे भी भफिका सबार होता है। चारों ओरसे दलके दल नगपतिपरायण वैष्णनगण आ-आकर

उनके शिष्य होने लगे और अपनेको भाग्यवान समझने लगे। उनमें दो-एक श्री यामुना चार्यजीके समान सन्यासाश्रम ग्रहण करके उन्ही के साथ सर्वदा रहकर अपनेको कृतार्थ मानने पेरियातिरमलेनम्झि यामुनाचार्य के प्रधान शिष्य थे।

उनकी दो भगमियां थी। यीका नाम भूमिपेराहिभूदेवी अपय कान्तिनती और छोटोका नाम पेरियापेह अया नह देवी ।पेरम्ब्एर निवासी आरि केशवाचार्य ने कान्तिमतीको व्याहा था और कनिष्ठ महादेबीका ब्याह मधुरमङ्गलम्ग्राम निवासी

कमलनयन भट्टके साथ हुआ था। दोनों भगनियोंका व्याद हो आनेपर श्री शैलपूर्ण निश्चिन्त होकर भगवान्का ध्यान करने लगे, और अन्तमे महात्मा यामुनाचार्य के समान सदगुरु पाकर कृ्षापस्थामे उनके सत्सगसे परमानन्दका उपभोग करने लगे।

लेखक द्वारकाप्रसाद शर्मा-Dwarkaprasad Sharma
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 188
Pdf साइज़11 MB
Categoryआत्मकथा(Biography)

रामानुजाचार्य का जीवन चरित – Ramanuja Ka Jeevan Charit Book Pdf Free Download

Leave a Comment

Your email address will not be published.