गजेंद्र मोक्ष स्त्रोत | Gajendra Moksha Stotra PDF In Sanskrit

गजेंद्र मोक्ष हिंदी पाठ अर्थ सहित – Gajendra Moksha Book/Pustak PDF Free Download

गजेंद्रमोक्ष स्त्रोत (Lyrics With Meaning)

श्रीशुक उवाच-श्रीशुकदेवजीने कहा

एवं व्यवसितो बुद्ध्या समाधा” मनो हृदि ।

जजाप परमं जाप्यं प्राग्जन्मन्यनुशिक्षितम् ॥ १ ॥

बुद्धिके द्वारा पिछले अध्यायमें वर्णित रीतिसे निश्चय करके तथा मनको हृदयदेशमें स्थिर करके वह गजराज अपने पूर्वजन्ममें सीखकर कण्ठस्थ किये हुए सर्वश्रेष्ठ एवं बार-बार दोहराने योग्य निम्नलिखित स्तोत्रका मन-ही-मन पाठ करने लगा ॥ १ ॥

गजेन्द्र उवाच-गजराजने (मन-ही-मन) कहा

ॐ नमो भगवते तस्मै यत एतच्चिदात्मकम् ।

पुरुषायादिबीजाय परेशायाभिधीमहि ॥ २ ॥

जिनके प्रवेश करनेपर (जिनकी चेतनताको पाकर) ये जड शरीर और मन आदि भी चेतन बन जाते हैं (चेतनकी भाँति व्यवहार करने लगते हैं), ‘ओम्’ शब्दके द्वारा लक्षित तथा सम्पूर्ण शरीरोंमें प्रकृति एवं पुरुषरूपसे प्रविष्ट हुए उन सर्वसमर्थ परमेश्वरको हम मन-ही-मन नमन करते हैं ॥ २ ॥

यस्मिन्निदं यतश्चेदं येनेदं य इदं स्वयम् ।

योऽस्मात्परस्माच्च परस्तं प्रपद्ये स्वयम्भुवम् ॥ ३ ॥

जिनके सहारे यह विश्व टिका है, जिनसे यह निकला है, जिन्होंने इसकी रचना की है और जो स्वयं ही इसके रूपमें प्रकट हैं- फिर भी जो इस दृश्य जगत्से एवं उसकी कारणभूता प्रकृतिसे सर्वथा परे (विलक्षण) एवं श्रेष्ठ हैं- -उन अपने-आप- बिना किसी कारणके बने हुए भगवान्‌की मैं शरण लेता हूँ ॥ ३ ॥

यः स्वात्मनीदं निजमाययार्पितं

क्वचिद्विभातं क्व च तत्तिरोहितम् ।

अविद्धदृक् साक्ष्यभयं तदीक्षते

स आत्ममूलोऽवतु मां परात्परः ॥ ४॥

अपनी संकल्प-शक्तिके द्वारा अपने ही स्वरूपमें रचे हुए और इसीलिये सृष्टिकालमें प्रकट और प्रलयकालमें उसी प्रकार अप्रकट रहनेवाले इस शास्त्र प्रसिद्ध कार्य-कारणरूप जगत्को जो अकुण्ठित-दृष्टि होनेके कारण साक्षीरूपसे देखते रहते हैं— उनसे लिप्त नहीं होते, वे चक्षु आदि प्रकाशकोंके भी परम प्रकाशक प्रभु मेरी रक्षा करें ॥ ४॥

कालेन पञ्चत्वमितेषु कृत्स्त्रशो

लोकेषु पालेषु च सर्वहेतुषु ।

तमस्तदाऽऽसीद गहनं गभीरं

यस्तस्य पारेऽभिविराजते विभुः ॥ ५॥

समयके प्रवाहसे सम्पूर्ण लोकोंके एवं ब्रह्मादि लोकपालोंके पञ्चभूतोंमें प्रवेश कर जानेपर तथा पञ्चभूतोंसे लेकर महत्त्वपर्यन्त सम्पूर्ण कारणोंके उनकी परमकारणरूपा प्रकृतिमें लीन हो जानेपर उस समय दुर्जेय तथा अपार अन्धकाररूप प्रकृति ही बच रही थी। उस अन्धकारके परे अपने परम धाममें जो सर्वव्यापक भगवान् सब ओर प्रकाशित रहते हैं, वे प्रभु मेरी रक्षा करें ।। ५ ।।

न यस्य देवा ऋषयः पदं विदु

र्जन्तुः पुनः कोऽर्हति गन्तुमीरितुम् ।

यथा नटस्याकृतिभिर्विचेष्टतो

दुरत्ययानुक्रमण: स मावतु ॥ ६ ॥

भिन्न-भिन्न रूपोंमें नाट्य करनेवाले अभिनेताके वास्तविक स्वरूपको जिस प्रकार साधारण दर्शक नहीं जान पाते, उसी प्रकार सत्त्वप्रधान देवता अथवा ऋषि भी जिनके स्वरूपको नहीं जानते, फिर दूसरा साधारण जीव तो कौन जान अथवा वर्णन कर सकता है— वे दुर्गम चरित्रवाले प्रभु मेरी रक्षा करें ॥ ६ ॥

गजेंद्र मोक्ष स्तोत्र का जाप के फायदे

अगर आप घर में सुख समृद्धि और शांति बनाए रखना चाहती हैं, तो गजेंद्र मोक्ष स्तोत्र का जाप आपके लिए बेहद लाभदायक है।

हिन्दू धर्म के अनुसार विभिन्न मन्त्रों और स्तोत्रों के जाप से घर में सुख शांति तो आती ही है कई समस्याओं से छुटकारा भी मिलता है।

मन्त्रों का जाप वास्तव में मस्तिष्क को शांति प्रदान करता है और कई पापों से मुक्ति दिलाकर मनोकामनाओं की पूर्ति भी करता है।

जब बात आती है स्तोत्र के जाप की तो कई ऐसे मन्त्र और स्तोत्र गीता में बताए गए हैं जिनसे घर में शांति आने के साथ आर्थिक स्थिति भी सुधरती है।

ऐसे ही स्तोत्रों में से एक है गजेंद्र मोक्ष स्तोत्र का जाप करना। पुराणों के अनुसार इस स्तोत्र का जाप करने से व्यक्ति कर्ज से मुक्त हो जाता है और साथ ही किसी भी संकट से मुक्ति मिलती है।

हिंदू धर्म के प्रथम ग्रंथ ”श्रीमद्भगवद गीता” के दूसरे,तीसरे और चौथे अध्याय में गजेंद्र स्तोत्र का वर्णन है। इसमें कुल 33 श्लोक दिए गए हैं। इस स्तोत्र में हाथी और मगरमच्छ के साथ हुए युद्ध का वर्णन किया गया है।

कर्ज से मुक्ति

यदि गजेन्द्र मोक्ष का पाठ नियमित रूप से ब्रह्म मुहूर्त में किया जाए तो किसी भी बड़े से बड़े कर्ज से मुक्ति मिलती है। मान्यता है कि कर्ज से मुक्ति पाने का सबसे बड़ा उपाय इस स्तोत्र का पाठ करना है। यह ऐसा अमोघ उपाय है जिससे बड़ा से बड़ा कर्ज भी श‍ीघ्र उतर जाता है। 

संकटों से मुक्ति 

कहा जाता है कि गजेंद्र मोक्ष का पाठ किसी भी बड़ी से बड़ी बाधा से बाहर निकालने में मदद करता है। ऐसा माना जाता है कि यदि व्यक्ति इस स्तोत्र का पाठ करता है तो स्वयं भगवान् विष्णु उसकी बाधाओं को हर लेते हैं और उसके लिए कठिन काम भी आसान हो जाते हैं। 

लड़ाई झगड़ों से मुक्ति 

यदि पति -पत्नी के बीच लड़ाइयां होती हैं तब भी इस स्तोत्र का पाठ अत्यंत फलदायी होता है। इस स्तोत्र के पाठ से बड़ी से बड़ी लड़ाइयों से छुटकारा पाया जा सकता है। 

पितरों की मुक्ति का मार्ग 

इस स्तोत्र का पाठ पितरों की मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करता है। ऐसा माना जाता है कि इस स्तोत्र का पाठ करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और उनके स्वर्ग का मार्ग प्रशस्त होता है। इस स्तोत्र के जाप को मुक्ति का धाम माना जाता है। 

गजेंद्र मोक्ष की कथा

इस स्तोत्र में एक हाथी और मगरमच्छ की कहानी है। एक हाथी अपने परिवार के साथ जंगल में घूम रहा था और जब उसे प्यास लगती है तब वो सरोवर के किनारे पानी पीने पहुंच जाता है।

सरोवर में कमल के फूल देखकर हाथी जल क्रीड़ा करने पहुंच जाता है। इतने में एक मगरमच्छ उस हाथी का पैर पकड़ लेता है और छोड़ता नहीं है।

हाथी के सभी परिवार वाले उसे बाहर निकालने की कोशिश करते हैं और अंत में वहीं छोड़कर चले जाते हैं। हाथी बाहर आने की कोशिश करता है, लेकिन मगरमच्छ उसका पैर नहीं छोड़ता है।

जब हाथी पूरी तरह डूबने लगता है तब उसने श्री हरी विष्णु को पुकारते हुए उनकी जो स्तुति की थी वही गजेंद्र मोक्ष स्तोत्र के नाम से जानी जाती है।

इस स्तुति को सुनकर भगवान् विष्णु वहां आए और गज की रक्षा की। तभी ये ये स्तोत्र सभी तरह के संकटों से मुक्ति के मार्ग दिखाता है। 

गजेंद्र मोक्ष स्तोत्र पितृ पक्ष में 16 दिनों तक अवश्य पढ़ना चाहिए, लेकिन अगर यह संभव नहीं हो पा रहा है तो सिर्फ सर्वपितृ अमावस्या के दिन इसका पाठ अवश्य करें।

वैसे तो आप दिनभर में कभी इस स्तोत्र का पाठ कर सकते हैं, लेकिन अगर आप इसें का पाठ सायंकाल के समय करते हैं तो और भी अधिक फलदायी हो जाता है। 

गजेंद्र मोक्ष कैसे करें? (पाठ विधि)

1. एक दीपक जलाएं तथा दक्षिण दिशा की ओर मुख कर यह पाठ करें।  

2. यह पाठ पूरा होने के बाद श्रीहरि विष्णु का स्मरण करें और उनसे और अपने घर के पितरों से प्रार्थना करें कि आपके घर से पितृ दोष को दूर करें और कर्ज मुक्ति के साथ ही आपके जीवन को खुशहाल कर दें।  

3. इसके बाद पितरों को जलेबी का भोग लगाएं। 

4. कम से कम 108 बार पितृ मंत्रों का जाप करें।

लेखक Gita Press
भाषा हिन्दी
कुल पृष्ठ 23
PDF साइज़6.3 MB
Categoryधार्मिक(Religious)

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