भूख | Bhookh

भूख | Bhookh Book/Pustak Pdf Free Download

पुस्तक का एक मशीनी अंश

सहसा पाचू का मन घृणा से भर उठा । ध्यान दूसरी तरफ करने के लिए उसने स्कूल के बरामदे के सामने फैले हुए मोहनपुर गाव की तरफ से अपनी खोई हुई आखें फिरा ली, खम्भे का सहारा घोरे-धीरे हाथ हटाकर छोडा और क्लास-हम की तरफ चला । दी वाल पर स्कूल मे लगाए जाने के लिए भेजे गए सरकारी पोस्टर चिपके ये। कास के दरवाजे के पास ही पहला पोस्टर था-“अन्न की पैदावार बढाओ।”

घृणा की भावना का एक झोका उसे फिर लगा। झुझलाहट मे उसके मुह से अपने-आप ही निकल पडा-“किसके लिए ” फिर उसके हाय ने झटककर पोस्टर को चीर डाला।

पाचू ने झटपट मुडककर सामने की ओर देखा। आसपास में कोई नही था । दूर, मोनाई बनिये की टूकान पर, जीवित नर-ककालो की भीड हो-हल्लड मचा रही थी। शायद किसी की निगाह उतपर नही पडी।

पाच ने एक नि एवान छोटी बोर कमरे का ताला खोलने लगा। वह सोच रहा था-“अगर किसी ने देख लिया हो नही-नही मान लो, झार बोई देख लेता ? मोनाई को दूकान पर पुलिसमैन तो खटा ही है, मगर उनकी नजर पड़ ई हो, तब तो बरी आफत होगी। वह आएगा, हाय पसारेगा, नहीं तो फिर याने में रिपोर्ट । टू गा वहा से साले को ? देने को ही होता तो काज चार दिन से घर मे ये एकादगी न होतो ।

पाचू के दिमाग को प्रलय के घनघोर वादलो ने ढक लिया । उसकी बन्द आखो के जागे घना अधेरा-सा छा गया । उसे लगा जैसे उस घने अधेरे मे वह कही बहुत ऊचे पर से नीचे की तरफ, तेजी के साय, खीच कर ले जाया जा रहा हो।

लेखकअमृतलाल नागर – Amritlal Nagar
भाषाहिन्दी
कुल पृष्ठ216
Pdf साइज़7 MB
Categoryउपन्यास (Novel)

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